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20-Dec-2025 02:29 PM
By First Bihar
Ishan Kishan comeback : भारतीय क्रिकेट टीम से लंबे समय तक बाहर चल रहे पटना के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट में ऐसा तूफान मचाया कि एक बार फिर उनका नाम टीम इंडिया की चर्चा में आ गया है। कप्तान के रूप में ईशान ने झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट का खिताब दिलाकर इतिहास रच दिया। हरियाणा के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले में ईशान किशन का बल्ला आग उगलता नजर आया और उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख पूरी तरह झारखंड के पक्ष में मोड़ दिया।
फाइनल मुकाबले में ईशान किशन ने 45 गेंदों पर ताबड़तोड़ शतक जड़ा। इस दौरान उन्होंने 10 छक्के और छह चौके लगाए। उनकी पारी न सिर्फ फाइनल की सबसे बड़ी हाइलाइट रही, बल्कि पूरे टूर्नामेंट में उनकी निरंतरता और आक्रामकता ने चयनकर्ताओं का ध्यान भी खींचा। ईशान ने प्रतियोगिता में 500 से अधिक रन बनाए और शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज का पुरस्कार भी मिला।
ईशान किशन का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वह पिछले काफी समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे। उन्होंने अपना आखिरी टी-20 इंटरनेशनल मैच नवंबर 2023 में खेला था। इसके बाद घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगातार रन बनाने के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में वापसी का मौका नहीं मिला। कई बार चयन को लेकर सवाल उठे, लेकिन ईशान ने मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब देना बेहतर समझा।
अगर भारतीय टीम के लिए ईशान किशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो वे काफी प्रभावशाली रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए 32 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, जिसमें 933 रन बनाए हैं। उनके नाम छह अर्धशतक दर्ज हैं। हालांकि उनका औसत 25.67 का रहा है, लेकिन टी-20 क्रिकेट में औसत से ज्यादा स्ट्राइक रेट को अहम माना जाता है। ईशान का स्ट्राइक रेट 124.37 का है, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली को दर्शाता है।
टी-20 वर्ल्ड कप को देखते हुए भारतीय टीम मैनेजमेंट को एक ऐसे खिलाड़ी की तलाश थी जो मिडिल ऑर्डर में तेजी से रन बना सके और जरूरत पड़ने पर मैच का रुख बदल सके। टीम में ऑलराउंडर की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। एशिया कप में रिंकू सिंह को मौका मिला था और उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ शानदार पारी खेलकर खुद को साबित भी किया था। वहीं, वाशिंगटन सुंदर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज में नजर आए थे।
मिडिल ऑर्डर ऑलराउंडर के तौर पर हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे की जगह लगभग तय मानी जा रही थी। ऐसे में रिंकू सिंह और वाशिंगटन सुंदर के लिए जगह बनना मुश्किल नजर आ रहा था। लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन और टीम को जीत दिलाने की क्षमता को देखते हुए चयनकर्ताओं ने इन खिलाड़ियों पर भरोसा जताया है। ईशान किशन की आक्रामक बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग स्किल्स भी उन्हें टीम के लिए एक मजबूत विकल्प बनाती हैं।
झारखंड को खिताब दिलाने के बाद ईशान किशन ने भारतीय टीम से बाहर रहने को लेकर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब उनका चयन नहीं हुआ तो उन्हें काफी बुरा लगा, क्योंकि वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। ईशान ने कहा, “जब मेरा इंडियन टीम में सेलेक्शन नहीं हुआ तो मुझे बहुत बुरा लगा। लेकिन मैंने खुद से कहा कि अगर इस प्रदर्शन के बाद भी मेरा चयन नहीं हो रहा है तो शायद मुझे और ज्यादा मेहनत करनी होगी। शायद मुझे अपनी टीम को जीत दिलानी होगी।”
ईशान किशन की यह सोच और जज्बा ही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। आलोचनाओं और निराशा के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि वे बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं।
अब एक बार फिर ईशान किशन की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। घरेलू क्रिकेट में शानदार फॉर्म और टीम को खिताब जिताने के बाद उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे टीम इंडिया में जगह पाने के हकदार हैं। आने वाले समय में अगर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलता है, तो भारतीय क्रिकेट को एक बार फिर उनका आक्रामक अंदाज देखने को मिल सकता है।