भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार रहे अजिंक्य रहाणे ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे रहाणे ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने दो दशक लंबे क्रिकेट सफर को विराम देने की घोषणा की। रहाणे का यह फैसला भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए भावुक करने वाला है, क्योंकि उन्होंने कई ऐसे यादगार पल दिए जिन्हें क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

रहाणे ने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए लिखा कि हर चीज की एक शुरुआत होती है और एक अंत भी होता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने हमेशा बल्लेबाजी में सही टाइमिंग पर भरोसा किया, उसी तरह उन्हें लगा कि अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का यही सही समय है। उन्होंने लिखा कि उन्होंने हमेशा देश और टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला।

टेस्ट क्रिकेट में बने भरोसे का दूसरा नाम

अजिंक्य रहाणे एक समय भारतीय टेस्ट टीम की रीढ़ माने जाते थे। विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और रहाणे की तिकड़ी ने कई वर्षों तक भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती दी। विदेशी सरजमीं पर उनकी शानदार बल्लेबाजी ने भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई। खासकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे कठिन दौरों पर रहाणे ने कई यादगार पारियां खेलीं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में लगातार खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी टेस्ट मुकाबला 20 जुलाई 2023 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। इसके बाद उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला।

सीमित ओवर क्रिकेट में नहीं जमा सके मजबूत जगह

टेस्ट क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड बनाने वाले रहाणे वनडे और टी-20 क्रिकेट में अपनी जगह स्थायी नहीं बना सके। उन्होंने भारत के लिए आखिरी वनडे मुकाबला 2018 में खेला था, जबकि टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में वह 2016 के बाद नजर नहीं आए। बदलते क्रिकेट और आक्रामक बल्लेबाजी की मांग के बीच रहाणे सीमित ओवरों की टीम से धीरे-धीरे बाहर हो गए।

कप्तानी में रचा था इतिहास

अजिंक्य रहाणे के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की जीत हमेशा सबसे ऊपर रहेगी। विराट कोहली की गैरमौजूदगी और टीम के कई प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने के बावजूद रहाणे ने युवा खिलाड़ियों के साथ ऑस्ट्रेलिया में भारत को ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जिताई। मेलबर्न टेस्ट में उनकी शतकीय पारी और शांत कप्तानी ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित नेताओं में शामिल कर दिया।

भावुक संदेश में जताया आभार

रहाणे ने अपने संदेश में कहा कि डोंबिवली से एक छोटे खिलाड़ी के रूप में अभ्यास करने से लेकर भारत के लिए खेलने तक का सफर उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें जीत और हार दोनों सिखाई, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि लोगों का प्यार रहा।

उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA), अपने सभी साथियों, कोचों, आईपीएल फ्रेंचाइजी, पत्नी राधिका, परिवार, दोस्तों और करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि क्रिकेट ने उन्हें कई बार मैदान पर हराया, लेकिन एक जगह ऐसी रही जहां वे कभी नहीं हारे और वह है फैंस का दिल।

अगली पीढ़ी के लिए करेंगे काम

अपने संदेश के अंत में रहाणे ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से उनका अध्याय जरूर समाप्त हो गया है, लेकिन खेल से उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करना चाहते हैं और क्रिकेट से मिली सीख और अनुभव को युवा खिलाड़ियों तक पहुंचाना चाहते हैं।

अजिंक्य रहाणे का करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपने शांत स्वभाव, अनुशासित खेल और टीम भावना से भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 'कैप नंबर 278' के नाम से पहचाने जाने वाले इस खिलाड़ी की विदाई भारतीय क्रिकेट के एक यादगार युग का अंत मानी जाएगी। उनके योगदान को भारतीय क्रिकेट हमेशा सम्मान के साथ याद रखेगा।