Vat Savitri 2026: वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर वट वृक्ष की पूजा करती हैं और पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। 


साथ ही सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब कुछ नियमों का पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जाए।


1. नकारात्मक विचारों से बचें

व्रत के दिन क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच से दूर रहना चाहिए और मन को शांत रखना चाहिए।


2. बाल और नाखून न काटें

इस दिन बाल या नाखून काटना अशुभ माना जाता है, जिससे व्रत का पुण्य कम हो सकता है।


3. काले, नीले या सफेद कपड़े न पहनें

इन रंगों के वस्त्र व्रत में अशुभ माने जाते हैं। लाल, पीले या गुलाबी जैसे शुभ रंग पहनना बेहतर होता है।


4. पति से विवाद न करें

व्रत के दिन पति के साथ किसी भी प्रकार की बहस या विवाद से बचना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए।


5. दोपहर में न सोएं

दोपहर में सोना अशुभ माना जाता है, इसलिए पूरे दिन सात्विक और सक्रिय रहना चाहिए।


6. व्रत कथा के समय न उठें

सावित्री-सत्यवान कथा के दौरान बीच में उठना व्रत के फल को कम कर सकता है, इसलिए एकाग्र रहकर कथा सुनें।


7. नकारात्मक चर्चा से दूर रहें

गपशप, निंदा और नकारात्मक बातचीत से बचना चाहिए ताकि वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहे।


मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप और भक्ति से सत्यवान को यमराज से वापस जीवन दिलाया था। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली का प्रतीक है। इसलिए 16 मई 2026 को व्रत रखने वाली महिलाएं इन नियमों का पालन करें।


डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं की जाती। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें।