Navratri 2026: नवरात्रि में सप्तमी, महाष्टमी और महानवमी तिथियों का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इन दिनों मां दुर्गा के भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। खासतौर पर महाष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजन, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इन तिथियों पर सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा करने से उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हालांकि, इस बार नवरात्रि में सप्तमी तिथि की वृद्धि होने के कारण सप्तमी, अष्टमी और नवमी व्रत की तारीखों को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन मनाई जाएंगी, जबकि कुछ लोग तीनों व्रत अलग-अलग दिनों में रखने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आइए, पंचांग और पंडितों के अनुसार जानते हैं कि वर्ष 2026 में सप्तमी, महाष्टमी और महानवमी व्रत कब रखा जाएगा।
कब है सप्तमी व्रत ?
पंचांग के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 5:56 बजे तक आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ होगी। सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को पूरे दिन रहने के बाद 18 अक्टूबर की सुबह लगभग 8:28 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने के कारण 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को सप्तमी व्रत रखना मान्य माना जा रहा है। इसलिए भक्त इस दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और व्रत कर सकते हैं।
कब है महाष्टमी व्रत ?
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 8:29 बजे प्रारंभ होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस गणना के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026, रविवार को महाष्टमी व्रत रखना उचित माना जा रहा है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना, हवन और कन्या पूजन कर सकते हैं। महाष्टमी की निशा पूजा भी 18 अक्टूबर को की जाएगी।
कब है महानवमी व्रत ?
पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 10:52 बजे प्रारंभ होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर के आसपास समाप्त होगी। इस प्रकार नवमी तिथि 19 अक्टूबर को दिन के अधिकांश समय विद्यमान रहेगी।
शास्त्रीय मान्यताओं में अष्टमी युक्त नवमी व्रत को विशेष महत्व दिया गया है। इस आधार पर 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को महानवमी व्रत रखा जा सकता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की पूजा, हवन और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।
सप्तमी तिथि की वृद्धि और अष्टमी-नवमी के समय को लेकर कुछ लोगों के बीच मतभेद हैं। उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय मौजूद तिथि के नियम का पालन करने वाले कुछ श्रद्धालु 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी का पूजन करने की परंपरा अपना सकते हैं।
हालांकि, पंचांग की गणना और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत की तारीखों में अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग या स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लेकर ही व्रत और पूजा की तारीख तय करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक जानकारियां पंचांग गणना और मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार तिथियों एवं पूजा-विधि में अंतर संभव है। व्रत और पूजा से संबंधित सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।