Janmashtami 2026: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर गृहस्थ, वैष्णव और साधु-संत व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत और बाल गोपाल की पूजा करने से संतान सुख, वैवाहिक सुख, सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग
ज्योतिषाचार्य के अनुसार शुक्रवार को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग रात 11:22 बजे तक रहेगा। उदया तिथि में अष्टमी होने के कारण पूरे दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की विशेष पूजा की जाएगी।
श्रद्धालु भगवान का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक कर नए वस्त्र पहनाएंगे। इसके बाद मोर पंख, बांसुरी, माला और इत्र से शृंगार किया जाएगा। पूजा के दौरान भगवान को पंजीरी, पंचमेवा, माखन-मिश्री और ऋतुफल का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद आरती कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
देवकी-वासुदेव की भी होगी पूजा
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी पर वृष राशि में चंद्रमा, रोहिणी नक्षत्र और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग रहेगा। साथ ही हर्षण और वज्र योग का भी संयोग बनने की बात कही गई है। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के साथ माता देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद और यशोदा की भी पूजा-अर्चना की जाएगी।
जन्माष्टमी व्रत से मिलते हैं ये लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा और जन्माष्टमी का व्रत करने से संतान सुख, वैवाहिक सुख, प्रेम में प्रगाढ़ता, सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति की प्राप्ति होती है। साथ ही परिवार में आपसी सद्भाव बढ़ने और नकारात्मकता दूर होने की भी मान्यता है। भविष्य पुराण में जन्माष्टमी व्रत के कई धार्मिक लाभ बताए गए हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु, गर्भपात, वैधव्य, दुर्भाग्य और पारिवारिक कलह जैसी परेशानियों से रक्षा होती है।
खरीदारी और साधना के लिए भी शुभ दिन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोहिणी नक्षत्र को उदार, मधुर, मनमोहक और शुभ नक्षत्र माना जाता है। 'रोहिणी' शब्द को विकास और प्रगति का सूचक माना गया है। इस कारण जन्माष्टमी का यह दिन जप, तप, साधना के साथ नई और बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी शुभ माना जा रहा है।
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
वृष लग्न: रात 09:43 बजे से 11:40 बजे तक
निशीथ लग्न: रात 11:26 बजे से 12:12 बजे तक
निशिता पूजा की अवधि: 46 मिनट
धार्मिक मान्यता के अनुसार निशीथ काल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रमुख समय माना जाता है। इसी अवधि में श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर जन्मोत्सव मनाते हैं।