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Holika Dahan 2026: होलिका दहन कब है? जानिए.. शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परिक्रमा का महत्व

Holika Dahan 2026: होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, परिक्रमा और पालन करने योग्य अनुष्ठान, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है।

Holika Dahan 2026

25-Feb-2026 07:40 PM

By FIRST BIHAR

Holika Dahan 2026: होलिका दहन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत खास होता है। यह हर साल फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है, और इसके अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाता है। होलिका दहन से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। परंपरा के अनुसार परिवार के सभी सदस्य होलिका की परिक्रमा करें और होलिका की अग्नि में विभिन्न शुभ सामग्री अर्पित करें।


होलिका दहन का शुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन रात में ही किया जाता है और दिन में इसे जलाने की परंपरा नहीं है। इस बार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू हो रही है, इसलिए होलिका दहन 2 मार्च की रात में होगा। इस साल होलिका दहन पर भद्रा का प्रभाव भी है।


होलिका पूजा सामग्री

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, नई फसल के धान्य जैसे पके चने और गेहूं की बालियों के अलावा गोबर से बनी ढाल और अन्य छोटे खिलौने भी रखे जाते हैं। होलिका दहन के दौरान पितरों के नाम, हनुमानजी के नाम, शीतलामाता के नाम और अपने घर-परिवार के नाम की चार मालाएं अलग रखी जाती हैं।


होलिका दहन के दिन करने योग्य कार्य

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। व्रत का संकल्प लें और होलिका दहन की तैयारी करें। जगह साफ करें और सभी सामग्री इकट्ठा करें। होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाकर भगवान नरसिंह की पूजा करें। शुभ मुहूर्त में होलिका को अग्नि दें और परिवार के साथ तीन परिक्रमा करें। होलिका की आग में गेहूं, चने, जौ, गोबर के उपले डालें। आग में गुलाल और जल अर्पित करें। होलिका की ज्वाला देखने के बाद ही भोजन करें। हनुमानजी की पूजा करें, जिससे सालभर शुभ परिणाम मिलते हैं। चंद्रमा का दर्शन परिवार के साथ करें; मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।


डिस्क्लेमर

इस आलेख में दी गई जानकारियाँ पूर्णतया सत्य होने का दावा नहीं करती हैं। अधिक सटीक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें।