Bengal CM Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए शनिवार का दिन काफी अहम रहा। शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ पांच मंत्रियों ने भी मंत्री पद की शपथ ली।


पांच मंत्रियों का भी शपथ ग्रहण

शपथ लेने वाले मंत्रियों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुड्डू शामिल हैं। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।


ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य आयोजन

कोलकाता के मध्य स्थित ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड को समारोह के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। भाजपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के बीच पूरे मैदान में उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुरक्षा के मद्देनजर शहरभर में कड़ी व्यवस्था की गई थी और हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।


सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस

भाजपा ने 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वहीं, पिछले 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव में सिमटकर 80 सीटों पर रह गई। भाजपा नेताओं ने इसे सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल में नए राजनीतिक दौर की शुरुआत बताया।


शुभेंदु की राजनीतिक यात्रा

शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में की थी। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। ग्रामीण बंगाल में तृणमूल के विस्तार में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।


हालांकि, वर्ष 2020 में ममता बनर्जी से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद वह बंगाल भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।


जिले से उभरकर सीएम बनने वाले पहले नेता

पूर्व मेदिनीपुर जिले से आने वाले शुभेंदु अधिकारी पिछले पांच दशकों में बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं, जो कोलकाता के पारंपरिक राजनीतिक केंद्र से नहीं, बल्कि किसी जिले से उभरकर सामने आए हैं। इससे पहले 1970 में अजय मुखर्जी ग्रामीण पृष्ठभूमि से मुख्यमंत्री बने थे।