west bengal cm face : पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथों में जाएगी। विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री के चेहरे पर अंतिम फैसला लेने की तैयारी में जुट गई है। इसी सिलसिले में आज कोलकाता में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah खुद नवनिर्वाचित विधायकों के साथ मंथन करेंगे। माना जा रहा है कि इस हाई-वोल्टेज बैठक के बाद पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में हलचल इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि बीजेपी ने राज्य में पहली बार अपने दम पर प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ किया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का 15 साल लंबा शासन समाप्त हो गया। टीएमसी इस चुनाव में महज 80 सीटों तक सिमट गई।
बीजेपी आलाकमान अब सरकार गठन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है। पार्टी ने विधायक दल के नेता के चुनाव को सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि Mohan Charan Majhi को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों नेता आज सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ अलग-अलग और सामूहिक बैठक करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह विधायकों की राय जानने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। बैठक में विधायक दल के नेता के नाम पर चर्चा होगी और फिर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के साथ सार्वजनिक किया जाएगा। बताया जा रहा है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता Samik Bhattacharya बैठक में विधायक दल के नेता के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे नाम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे Suvendu Adhikari का माना जा रहा है। नंदीग्राम के बाद भवानीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर जीत दर्ज करने के बाद उनका कद पार्टी में और मजबूत हुआ है। चुनाव अभियान के दौरान भी शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के सबसे आक्रामक चेहरों में शामिल रहे। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी बंगाल में हिंदुत्व और संगठन दोनों को साधने के लिए उन पर दांव लगा सकती है।
हालांकि बीजेपी अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए भी जानी जाती है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री पद की रेस केवल शुभेंदु अधिकारी तक सीमित नहीं मानी जा रही। पार्टी महिला वोटरों को साधने के लिए किसी महिला विधायक को भी बंगाल की कमान सौंप सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार में शामिल किसी अनुभवी बंगाली चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की रणनीति भी अपना सकती है।
इस बीच नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi 9 मई को कोलकाता पहुंच सकते हैं, जहां वे नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। बीजेपी इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटी है क्योंकि यह पहली बार होगा जब पार्टी पश्चिम बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत भी है। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में रहने वाले बंगाल में बीजेपी का उभार राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
अब सबकी नजरें आज होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ मुख्यमंत्री के नाम का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि बीजेपी बंगाल में अपनी नई सरकार के जरिए किस तरह का राजनीतिक संदेश देना चाहती है। अगले कुछ घंटे राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं।