Bihar News: सत्ता के गलियारे में शराब की खाली बोतल मिली. शराब का सेवन- कारोबार बंद करने वाला कानून लागू हुए दशक बीतने के बाद भी चहुँओर शराब मिलने के बाद बंदी के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं. मीडिया ने जब सरकार से सवाल पूछा, बस क्या था, सत्ता को यह सवाल नागवार गुजरी. सूबे के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी उखड़ गए. पूछा- आप शराबबंदी कानून क्यों कहते हैं ? कानून का क्या नाम है जानते हैं ? हत्या के लिए कानून है, क्या आप हत्याबंदी कानून कहते हैं ? अगर नहीं कहते हैं तो फिर शराबबंदी कानून क्यों कहते हैं ?
उप मुख्य़मंत्री विजय चौधरी आज मंगलवार को प्रदेश जेडीयू कार्यालय में थे. पार्टी की तरफ से प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई थी. इस दौरान उप मुख्यमंत्री से पूछा गया कि अब तो सचिवालय में शराब की बोतलें मिल रही हैं. यह कैसी शराबबंदी है ? विजय चौधऱी के कान में जैसे ही शराबबंदी शब्द गई, वे तमतमा गए । सवाल करने वाले पत्रकार से पूछा, शराबबंदी कानून आपने पढ़ा है? कानून का क्या नाम है? बस....हो गया. नाम है मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम. सब आदमी एक बार में समझ लीजिए। आप जैसे लोगों के लिए ही हमने विधानसभा में कहा था.
विजय चौधरी यहीं नहीं रूके. उन्होंने कहा कि आप लोग बार-बार शराबबंदी कानून लिखते-पढ़ते हैं. जबकि कानून का नाम है मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम. इस कानून में एक ही बात कही गई है कि शराब पीना, शराब बेचना, शराब में व्यापार करना, शराब का भंडारण करना या शराब से जुड़ी कोई उत्पादकता या अन्य काम करना दंडनीय अपराध है .कानून यही कहता है कि शराब बेचते, पीते ,भंडारण करते पकड़ाएंगे उन्हें कानून के तहत सजा मिलेगी. बिहार इसमें रिकॉर्ड नंबर पर जा रहा है. आप न्यायालय से जाकर दस्तावेज देख लीजिए कि कितने पीने वालों को सजा हुई है. इतने पीने वालों को सजा हुई है तो यह कानून की सफलता है या विफलता है?
उन्होंने कहा कि आप लोग समझते नहीं है. हम यही पूछते हैं कि शराब पीने को अपराध बनाना इस कानून का काम है. हत्या करना अपराध है, इसके लिए सजा है तो आप हत्याबंदी कानून कहते हैं ? फिर आपलोग शराब बंद करने के कानून को शराबबंदी क्यों कहते हैं? इसके बाद विजय चौधरी उठकर चल दिए।