Bihar Politics: वैशाली के राघोपुर में हुए दुखद नावा हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई। इस घटना को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। राघोपुर से विधायक और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि हादसे के बाद कई बच्चे घंटों जीवित थे लेकिन समय पर मदद नहीं मिलने और लापरवाही के कारण उनकी जान चली गई।



तेजस्वी ने एक्स पर लिखा, “कहते हैं कफ़न का माप जितना छोटा हो शव का बोझ उतना ही ज़्यादा होता है। प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी से राघोपुर क्षेत्र में हुई हृदय विदारक घटना के अपने पीड़ित परिजनों से मिला तो जो बातें सामने आईं उसे सुनकर बड़बोले सम्राट चौधरी और तमाम NDA नेताओं को शर्म से डूब मरना चाहिए।



* प्रशासन को घटना की सूचना मिलते ही तत्काल जानकारी दी गई लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया।

* SDRF की टीम घटना स्थल पर 3 घंटे की देरी से पहुंची, तब तक स्थानीय लोगों ने मिलकर सभी पीड़ितों को बाहर निकाल लिया था। 2 घंटे की देरी से पहुंची टीम फोटोशूट के लिए बेमलतब कई घंटे Boat घुमाती रही।

* ग्रामीणों और स्थानीय तैराकों द्वारा पानी से निकाले गए कई बच्चे घंटों तक जीवित थे और बच जाने की स्थिति में थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने उनकी जान ले ली

* एंबुलेंस देर से पहुंची। एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं था। किसी तरह घंटों बाद बच्चों को हॉस्पिटल लाया गया तो वहाँ भी ऑक्सीजन नहीं था और ना ही दवाई एवं इलाज की उचित व्यवस्था थी।

* ऑक्सीजन की कमी से कम से कम 5-6 बच्चे मरे। 



21 साल से सत्ता में कुंडली मार कर बैठे बेशर्म लोग राहत के नाम पर महज 04 लाख देकर बच्चों की जिंदगी का सौदा करना बंद करें। सरकार की घोर लापरवाही और जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था से कई परिवारों का वंश खत्म हो गया है। पीड़ित परिवारों का रुदन और चीत्कार छाती को चीर रहा है। 



मुख्यमंत्री अविलंब स्वयं जाकर पीड़ित परिवारों से मिलें और उनकी चीख पुकार को सुनें तब जाकर शायद उनको थोड़ी शर्म आए। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री भी Paid PRबाजी से बाहर निकल पीड़ित परिवार के पास जाएँ और जवाब दें कि इलाज, दवाई और ऑक्सीजन की कमी से आधा दर्जन से अधिक चिराग क्यों बुझ गए?



साथ ही सरकार हर पीड़ित परिवार को कम से कम 03 डिसमिल जमीन दे। प्रशासनिक व्यवस्था को चाक चौबंद करे ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना भूल से भी ना हो। और ज़रूरत पड़े तो समय से एंबुलेंस आए, ऑक्सीजन की व्यवस्था हो और साथ ही अस्पतालों में उचित इलाज और दवाई की समूची सुविधा हो।"