Tejashwi Yadav: बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण की चल रही प्रक्रिया को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। 10 अगस्त 2026 को लिखे पत्र में तेजस्वी यादव ने खास तौर पर उर्दू, अरबी और फारसी विषय के शिक्षकों के साथ कथित भेदभाव और नियमविरुद्ध व्यवहार का आरोप लगाते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में कहा है कि बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण की वर्तमान प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। विशेष रूप से उर्दू, अरबी और फारसी विषय के शिक्षकों के साथ कथित भेदभावपूर्ण और नियमविरुद्ध व्यवहार से शिक्षकों में व्यापक असंतोष है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि पूरी स्थानांतरण व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है।
कई स्कूलों में एकमात्र विषय शिक्षक को भी सरप्लस घोषित करने का आरोप
तेजस्वी यादव ने पत्र में दावा किया कि कई विद्यालयों में उर्दू, अरबी और फारसी के एकमात्र शिक्षक को भी सरप्लस घोषित कर स्थानांतरण सूची में शामिल कर दिया गया है। उनका कहना है कि यदि किसी विद्यालय में किसी विषय का केवल एक शिक्षक उपलब्ध है तो उसे सरप्लस मानकर स्थानांतरित करना उस विद्यालय में संबंधित विषय की पढ़ाई समाप्त करने के समान होगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पर्याप्त छात्र संख्या वाले विद्यालयों में इन विषयों के स्वीकृत पदों को समाप्त अथवा सरप्लस किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा पांच वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षकों, संविदा शिक्षकों और हाल में स्थानांतरण प्राप्त शिक्षकों के नाम भी सूची में शामिल किए जाने को लेकर शिकायतें मिलने की बात पत्र में कही गई है।
उर्दू और संस्कृत को लेकर तेजस्वी की सरकार से अपील
तेजस्वी यादव ने कहा कि संस्कृत के साथ-साथ उर्दू भी भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की भाषा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि उर्दू और संस्कृत दोनों विषयों को समान शैक्षणिक महत्व दिया जाए और प्रत्येक सरकारी विद्यालय में इन विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस निर्णय लिया जाए।
पत्र में अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन का मुद्दा भी उठाया गया है। तेजस्वी ने कहा कि इन संस्थानों के कर्मचारियों का लगभग पांच से छह महीने का वेतन लंबित होने की शिकायत है। इससे उनके परिवारों की शिक्षा, चिकित्सा, दैनिक खर्च और अन्य आवश्यकताएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की।
तेजस्वी ने सरकार के सामने रखीं 8 मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से शिक्षकों के हित में तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए आठ बिंदु रखे हैं। इनमें उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षकों की सरप्लस/स्थानांतरण सूची की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा, नियमविरुद्ध पाए जाने वाले सभी स्थानांतरण रद्द करना और विद्यालयों में कार्यरत एकमात्र विषय शिक्षक को सरप्लस घोषित करने की प्रक्रिया रोकना शामिल है।
उन्होंने उर्दू, अरबी और फारसी के स्वीकृत पदों को समाप्त नहीं करने, पांच वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षकों, संविदा शिक्षकों तथा हाल में स्थानांतरण प्राप्त शिक्षकों से जुड़े मामलों की नियमों के अनुसार दोबारा समीक्षा करने की भी मांग की है।
इसके अलावा प्रत्येक सरकारी विद्यालय में उर्दू एवं संस्कृत विषय के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाने तथा अनुदानित मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों-कर्मियों का लंबित वेतन तत्काल जारी करने की मांग की गई है।
तेजस्वी यादव ने पूरी प्रक्रिया में हुई विसंगतियों की जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के साथ अन्याय, विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों की उपेक्षा और महीनों तक वेतन रोककर रखना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश देने की मांग की, ताकि बिहार की शिक्षा व्यवस्था राजनीतिक या प्रशासनिक लापरवाही का शिकार न बने।