Bihar Politics: बिहार के 12 शहरों में बनने वाले सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना का काम जारी है हालांकि कहीं कहीं इसको लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है। पटना समेत कई जिलों में किसान अपनी पुरखों की जमीन सरकार को देने के पक्ष में नहीं हैं और विरोध जता रहे हैं।
पिछले दिनों पटना की सड़कों पर बड़ी संख्या लोग उतरे थे और उनका स्पष्ट कहना था कि जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे। अब लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को किसान विरोधी बताया है।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा, “किसान विरोधी है सैटेलाईट टाउनशिप के नाम पर सम्राट सरकार के द्वारा जबरन किया जा रहा भूमि अधिग्रहण ..
बिहार में 'सैटेलाइट टाउनशिप' परियोजना के तहत किसानों की कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण ने खेतिहर किसानों के समक्ष कई सामाजिक एवं आर्थिक समस्याएं खड़ी कर दी हैं l बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में सैटेलाइट टाउनशिप के नाम पर बहु-फसली और उपजाऊ भूमि का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है। इससे राज्य की खाद्य सुरक्षा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ने जा रहा है। गौरतलब है कि जमीन एक किसान परिवार की पीढ़ी दर पीढ़ी के लिए आजीविका एवं आमदनी का स्रोत होती है और सम्राट सरकार के द्वारा किसानों को अपनी जमीन देने के लिए मजबूर किया जाना, सीधे तौर पर किसानों के लिए आजीविका का संकट खड़ा करना है l छोटे और सीमांत किसानों के पास आय का एकमात्र जरिया उनकी जमीन होती है। जमीन छिन जाने से वे अपनी पुश्तैनी आजीविका खो देते हैं और उन्हें मजदूरी करने पर मजबूर होना पड़ता है।
बिहार में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप योजना आम लोगों और किसानों के कल्याण से अधिक रियल एस्टेट बिल्डरों और निजी कंपनियों को लाभ पहुँचाने के मकसद से सम्राट सरकार के द्वारा लायी गयी है l कृषि योग्य उपजाऊ जमीन पर कंक्रीट के जंगल खड़े करने और हरित क्षेत्रों को नष्ट करने से जल स्तर का गिरना और स्थानीय पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचना भी तय है।
भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA) और किसानों की पूर्व सहमति की जो व्यवस्था है, उसका पालन भी सम्राट सरकार के द्वारा नहीं किया जा रहा है l प्रशासनिक तंत्र के दबाव के बल पर किसानों से उनकी जमीन लेने की कवायद जारी है ल
जबरन किए जा रहे भूमि अधिग्रहण पर सांसदों - विधायकों की चुप्पी भी हैरान करने वाली है , किसानों के साथ जन प्रतिनिधियों के नहीं खड़े होने से ही साफ़ होता है कि सबों की मिलीभगत से किसानों को परेशानी में डाला जा रहा है और मकसद सिर्फ एक है " सत्ताधारी खेमे के असली आकाओं पूंजीपतियों - कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचना l"
किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करना विकास नहीं विनाश की पहल है । सरकार को बंजर भूमि पर टाउनशिप विकसित कर किसानों के अधिकारों व् आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए है।”