Bihar Politics: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अप्रैल, 2026 को विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया, हालांकि इस पर विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
सदन में यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ और मतदान की नौबत नहीं आई। एकदिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री की ओर से पेश किए गए एक पंक्ति के प्रस्ताव को करीब 90 मिनट की चर्चा के बाद स्वीकृति मिल गई। इसके साथ ही सम्राट चौधरी सरकार ने सदन में बहुमत साबित कर दिया।
इधर, जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने खगड़िया में मीडिया से बातचीत के दौरान इस बहुमत को जनसमर्थन का वास्तविक बहुमत मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे लोकप्रियता का बहुमत नहीं बल्कि 10 हजार रुपये में खरीदा गया बहुमत बताया और आरोप लगाया कि यह सत्ता बैकडोर से हासिल की गई है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि यह बहुमत 202 विधायकों का समर्थन नहीं बल्कि सत्ता और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग” से बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर यह बहुमत तैयार किया गया और जिन लोगों ने इसमें भूमिका निभाई, उन्होंने नीतीश कुमार को हटाकर अपनी पसंद के नेता को मुख्यमंत्री बनाया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने उनके चाल, चरित्र और चेहरे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी को किसी अदालत ने पूरी तरह बरी नहीं किया है, बल्कि उन्हें केवल नाबालिग होने के कारण राहत मिली थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अपने दम पर इस पद तक नहीं पहुंचे, बल्कि उन्हें शीर्ष नेतृत्व के समर्थन से यह जिम्मेदारी मिली है।