Kailashpati Mishra: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कैलाशपति मिश्र की जयंती को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अगले वर्ष से कैलाशपति मिश्र की जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाएगी।



मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कैलाशपति मिश्र को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने लिखा कि गुजरात के पूर्व राज्यपाल और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री कैलाशपति मिश्र ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण तथा समाज और संगठन की सेवा के लिए समर्पित किया।



सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि कैलाशपति मिश्र के योगदान, विचारों और सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका को सम्मान देते हुए आगामी वर्ष से उनकी जयंती राजकीय समारोह के रूप में मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह निर्णय बिहार की धरती के इस नेता के प्रति सरकार की श्रद्धांजलि और कृतज्ञता का प्रतीक है।



दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हुई थी। स्थापना के समय अपेक्षाकृत छोटी राजनीतिक पार्टी रही बीजेपी ने देश की राजनीति में अपना व्यापक विस्तार किया और आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। पार्टी को देशभर में मजबूत आधार देने में उसके अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका रही। इनमें बिहार के कैलाशपति मिश्र का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।



बीजेपी के गठन से पहले देश में भारतीय जनसंघ सक्रिय था। बीजेपी के गठन के बाद जनसंघ से जुड़े कई नेता नई पार्टी में शामिल हुए। जनसंघ का वैचारिक जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से रहा था और बीजेपी ने भी शुरुआती दौर में इसी वैचारिक पृष्ठभूमि को आगे बढ़ाया।



बिहार में बीजेपी के संगठन को खड़ा करने और उसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने में कैलाशपति मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बड़े नेता होने के बावजूद उनकी पहचान जमीन से जुड़े और सादगीपूर्ण नेता के रूप में थी। पार्टी संगठन के विस्तार के लिए वे गांवों और शहरों में आम लोगों के बीच पहुंचते थे।



कहा जाता है कि एक बार कैलाशपति मिश्र रिक्शे से मोकामा पहुंचे थे, जहां बीजेपी की बैठक आयोजित हुई थी। इसके बाद वे साइकिल से हाथीदह पहुंचे और वहां पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई। उस बैठक में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी साइकिल से पहुंचे थे। उनके इस तरह के दौरों ने पार्टी के संगठन को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने में भूमिका निभाई।



कैलाशपति मिश्र बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और वे बिहार बीजेपी के पहले प्रदेश अध्यक्ष बने। इससे पहले वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में काम कर चुके थे। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं के साथ उन्होंने संगठन में काम किया।



उन्होंने विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन संगठन तथा सार्वजनिक जीवन को समर्पित कर दिया। वे बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दो कार्यकाल तक जिम्मेदारी संभाल चुके थे। पहली बार वे 1980 से 1981 तक और दूसरी बार 1984 से 1987 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। बिहार बीजेपी के संगठन को शुरुआती दौर में मजबूत करने और पार्टी को राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में उनके योगदान के कारण उन्हें 'बिहार बीजेपी का भीष्म पितामह' भी कहा जाता है।