Ritlal Yadav Bail: दानापुर के पूर्व राजद विधायक रीतलाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। पटना हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी विशेष जमानत याचिका खारिज कर दी और पटना हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
रीतलाल यादव से जुड़े मामले में 3 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई की। रीतलाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने पक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को मामले में जल्द आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने रीतलाल यादव के लिए आगे जमानत की संभावना का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है।
अदालत ने कहा कि आरोप तय होने की तारीख से अगले एक साल के भीतर यदि मुकदमे की सुनवाई में कोई पर्याप्त प्रगति नहीं होती है, तो रीतलाल यादव दोबारा पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में उन्हें ट्रायल को जल्द आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करना होगा।
इसका मतलब है कि फिलहाल रीतलाल यादव को जमानत नहीं मिली है। लेकिन आरोप तय होने के बाद यदि एक साल तक मुकदमे में पर्याप्त प्रगति नहीं होती है, तो उनके पास दोबारा हाईकोर्ट का रुख करने का विकल्प रहेगा।
रीतलाल यादव के खिलाफ मामला कथित संगठित अपराध और रंगदारी के आरोपों से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रीतलाल यादव अन्य लोगों के साथ एक संगठित गिरोह का हिस्सा रहे हैं। आरोप है कि रियल एस्टेट कारोबारियों और व्यवसायियों को धमकाकर उनसे पैसे की मांग की जाती थी और रंगदारी वसूली जाती थी। जांच एजेंसियों ने यह आरोप भी लगाया है कि इन गतिविधियों के जरिए ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई। हालांकि, ये सभी अभियोजन पक्ष के आरोप हैं और इनकी अंतिम पुष्टि ट्रायल के दौरान ही होगी।
यह मामला भवन निर्माण कंपनी जेनेक्स इको इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड से कथित रंगदारी मांगने से जुड़ा है। कंपनी ने वर्ष 2023 में खगौल-दानापुर के कोठवा गांव में एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। आरोप है कि बाद में कंपनी के एक साझेदार को बुलाकर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। शिकायतकर्ता की ओर से चार लाख रुपये देने और 30 लाख रुपये का लिखित नोट तैयार कराए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पटना हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद रीतलाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के जमानत संबंधी आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया है। अब इस मामले की आगे की दिशा ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने और उसके बाद मुकदमे की सुनवाई की गति पर निर्भर करेगी।