ब्रेकिंग न्यूज़

Coal Mining Accident: कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट, 10 मजदूरों की मौत, कई के मलबे में फंसे होने की आशंका Coal Mining Accident: कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट, 10 मजदूरों की मौत, कई के मलबे में फंसे होने की आशंका बिहार के लाखों किसानों को बड़ी राहत: अब पूर्वजों के नाम की जमीन होने पर भी बनेगा फार्मर आईडी, देना होगा सिर्फ यह दस्तावेज बिहार के लाखों किसानों को बड़ी राहत: अब पूर्वजों के नाम की जमीन होने पर भी बनेगा फार्मर आईडी, देना होगा सिर्फ यह दस्तावेज महंगाई भत्ते पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला...ममता सरकार के अन्याय के आगे कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत- मंगल पांडेय Bihar Crime News: डबल मर्डर केस के तीन आरोपी अरेस्ट, कुख्यात अपराधी ने घर बुलाकर कर दी थी दो लोगों की हत्या Bihar Teacher News: शिक्षक ट्रांसफर-पोस्टिंग की हकीकत- मांगा गोपालगंज भेज दिया गया कटिहार, विधान परिषद में भाजपा MLC ने उठाए सवाल...सरकार को घेरा Bihar Crime News: हत्या के मामले का 24 घंटे के भीतर खुलासा, मुख्य साजिशकर्ता समेत पांच आरोपी अरेस्ट Bihar Crime News: हत्या के मामले का 24 घंटे के भीतर खुलासा, मुख्य साजिशकर्ता समेत पांच आरोपी अरेस्ट Bihar News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होगी बिहार की यह पहली सरकारी कंपनी, IPO लाने की प्रक्रिया शुरू; कोई भी लगा सकता है पैसा

बिहार चुनाव को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे प्रशांत किशोर: जन सुराज पार्टी ने दायर की याचिका, नये सिरे से इलेक्शन कराने की मांग

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने चुनाव आचार संहिता के दौरान महिलाओं को ₹10,000 ट्रांसफर को अवैध बताते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।

Bihar Politics

05-Feb-2026 03:04 PM

By FIRST BIHAR

DELHI: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने Prashant Kishore की पार्टी जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने Supreme Court of India में एक रिट याचिका दायर कर चुनावों में अवैध और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया है तथा नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है।


शुक्रवार को हो सकती है सुनवाई

जन सुराज पार्टी की याचिका में खास तौर पर चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू रहने के दौरान राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को सीधे ₹10,000 की राशि ट्रांसफर किए जाने को चुनौती दी गई है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज़ॉयमाल्य बागची की बेंच शुक्रवार को कर सकती है. यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है।


10,000 ट्रांसफर को बताया असंवैधानिक

जन सुराज पार्टी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि चुनाव आचार संहिता के प्रभावी रहते हुए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ा गया और उन्हें ₹10,000 की राशि दी गई, जो कि अवैध और असंवैधानिक है। याचिका में कहा गया है कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार),  अनुच्छेद 112 और 202 (वित्तीय प्रावधान) और अनुच्छेद 324 (चुनाव आयोग की शक्तियां) का उल्लंघन करता है।


चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग

याचिका में चुनाव आयोग (Election Commission of India) से मांग की गई है कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (जो भ्रष्ट आचरण से संबंधित है) के तहत कार्रवाई करे। जन सुराज पार्टी का दावा है कि बिहार चुनाव के दौरान 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे 10,000 रूपये की राशि ट्रांसफर की गई,  यह सीधे तौर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश थी. 


जीविका दीदियों की तैनाती पर भी सवाल

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मतदान के दोनों चरणों में जीविका (JEEViKA) स्वयं सहायता समूह से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती की गई, जो निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है। पार्टी का कहना है कि यह कदम अनुचित और पक्षपातपूर्ण था।


नए सिरे से चुनाव कराने की मांग

कथित भ्रष्ट आचरणों का हवाला देते हुए जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले S. Subramaniam Balaji बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से यह भी कहा गया है कि वह फ्रीबी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर स्पष्ट और व्यापक दिशा-निर्देश बनाए।


साथ ही यह मांग भी की गई है कि चुनाव आयोग यह तय करे कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कम से कम छह महीने पहले ही ऐसी योजनाओं को लागू किया जाए, जिनका सीधा असर चुनावों की निष्पक्षता पर पड़ता है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की कल होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर यह याचिका कितनी दूर तक असर डालती है।