Prashant Kishor : बिहार की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) की हो रही है। इसकी वजह है बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव, जहां उन्होंने पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया है। वर्षों तक देश के बड़े नेताओं के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर अब खुद जनता के बीच वोट मांगते नजर आए। मतगणना के शुरुआती रुझानों में उनकी बढ़त ने इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है।
इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है कि आखिर प्रशांत किशोर ने कितनी पढ़ाई की है? राजनीति में आने से पहले उनका पेशा क्या था? उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में किस तरह काम किया और आखिर चुनावी रणनीतिकार से नेता बनने तक का उनका सफर कैसा रहा? आइए जानते हैं उनकी पूरी एजुकेशनल और प्रोफेशनल प्रोफाइल।
बिहार के रोहतास में हुआ जन्म
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। बाद में उनका परिवार बक्सर आकर बस गया। उनकी शुरुआती शिक्षा बिहार में ही हुई। बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाले प्रशांत किशोर ने अपनी स्कूली शिक्षा बक्सर से पूरी की। उन्होंने वर्ष 1991 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) से संबद्ध एम.पी. हाई स्कूल, बक्सर से 10वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद 1993 में पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी की।
लखनऊ विश्वविद्यालय से BBA की डिग्री
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रशांत किशोर ने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहां उन्होंने वर्ष 1996 से 1999 के बीच बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की। बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई ने उन्हें संगठन, नेतृत्व और प्रबंधन की बारीकियों को समझने का अवसर दिया।
इसके बाद उन्होंने हैदराबाद स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन (MHA) किया। यह विशेष कोर्स जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और हिंदुजा हॉस्पिटल के सहयोग से संचालित किया जाता था। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नीति निर्माण से जुड़े विषयों में विशेषज्ञता हासिल की।
फ्रांस जाकर सीखी फ्रेंच भाषा
प्रशांत किशोर ने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी अपनी शिक्षा का विस्तार किया। वर्ष 2010 में उन्होंने फ्रांस के प्रतिष्ठित CAVILAM Vichy संस्थान से फ्रेंच भाषा का विशेष प्रशिक्षण लिया। यह संस्थान क्लेरमों-फेरां विश्वविद्यालय से संबद्ध माना जाता है। विदेशी भाषा का यह प्रशिक्षण उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़कर किया काम
राजनीति में आने से पहले प्रशांत किशोर ने करीब आठ वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की फंडिंग वाले पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण और विकास से संबंधित कई कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। UN के साथ काम करते हुए उन्हें सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और विकास नीतियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव आगे चलकर उनकी रणनीतिक सोच की सबसे बड़ी ताकत बना।
यहीं से बदली करियर की दिशा
संयुक्त राष्ट्र में सफल करियर के बावजूद प्रशांत किशोर ने राजनीति की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने चुनावी रणनीति को पेशेवर रूप देने के उद्देश्य से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) की स्थापना की।I-PAC के जरिए उन्होंने चुनाव प्रबंधन, डेटा एनालिसिस, जनसंपर्क और बूथ स्तर तक रणनीति तैयार करने का नया मॉडल विकसित किया। देखते ही देखते वे देश के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकार बन गए।
कई बड़े नेताओं के लिए बनाई चुनावी रणनीति
प्रशांत किशोर ने अलग-अलग समय में देश के कई प्रमुख नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ काम किया। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। उनकी चुनावी रणनीतियों को कई राज्यों में राजनीतिक जीत का महत्वपूर्ण कारण माना जाता रहा है। इसी वजह से उन्हें देश का सबसे सफल चुनावी रणनीतिकार भी कहा जाता है।
2024 में बनाई अपनी पार्टी 'जन सुराज'
दूसरे नेताओं के लिए रणनीति बनाने के बाद प्रशांत किशोर ने खुद सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया। 2 अक्टूबर 2024 को उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी 'जन सुराज' की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने बिहार के गांव-गांव तक पहुंचकर संगठन को मजबूत करने और जनाधार बढ़ाने का अभियान शुरू किया।उन्होंने बिहार की राजनीति में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सुशासन जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश की।
पहली बार लड़ रहे हैं चुनाव
वर्ष 2026 का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव प्रशांत किशोर के राजनीतिक जीवन का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। यह पहला मौका है जब वे खुद किसी चुनाव में उम्मीदवार बने हैं। अब तक पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर इस बार सीधे जनता से वोट मांगते नजर आए।
मतगणना के शुरुआती रुझानों में उनकी बढ़त ने साफ संकेत दिया कि बिहार की राजनीति में जन सुराज एक नई ताकत के रूप में उभर सकती है। अंतिम नतीजे चाहे जो हों, लेकिन पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर ने इस मुकाबले को राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले पीके क्या जनता का भरोसा जीतकर विधायक बनने का नया अध्याय भी शुरू कर पाएंगे।