Bihar News: राजधानी पटना को 2019 में किसने डूबोया था.किसकी लापरवाही राजधानीवासी जल कैदी बन गए थे. हालात ऐसे हो गए थे कि, तत्कालीन डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी को निजी आवास से रेस्क्यू करना पड़ा था. पटना के डूबने पर तत्कालीन मुख्य़मंत्री नीतीश कुमार की देश भर में भारी किरकिरी हुई थी. तब उन्होंने ने यह आदेश दिया था कि पटना को डूबोने वाले अधिकारियों पर ऐसी कार्रवाई होगी, लोग लंबे समय तक याद रखेंगे. दिखावे के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में जांच टीम बैठी, रिपोर्ट आने के बाद कई इंजीनियर-अफसरों का निलंबन हुआ. समय के साथ सरकार ने सभी को आरोप मुक्त कर दिया. यानि, सरकार ने माना कि पटना को अधिकारियों इंंजीनियरों ने नहीं डूबोया था.
एक साथ तीन इंजीनियर हुए दोष मुक्त
पथ निर्माण विभाग ने 28 जुलाई 2026 को एक साथ तीन वरिष्ठ इंजीनियरों को आरोप मुक्त किया है. ये हैं तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-प्रभारी अधीक्षण अभियंता, बुडको सूर्यकान्त, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बुडको संजीव चौधरी और ओमप्रकाश सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बुडको. वर्ष 2020 में ये तीनों इंजीनियर नगर विकास विभाग के अंतर्गत बुडको में बतौर कार्यपालक अभियंता-अधीक्षण अभियंता के पद पर पटना में पदस्थापित थे. तब ये तीन इंजीनियर प्रतिनियुक्त के आधार पर नगर विकास विभाग में तैनात थे.
नगर विकास विभाग ने 10 फरवरी 2020 को पथ निर्माण विभाग को भेजा था पत्र
नगर विकास एवं आवास विभाग 10 फरवरी 2020 को पथ निर्माण विभाग को पत्र भेजा था. जिसमें उल्लेख किया गया था कि, पटना शहर में जल जमाव के लिए गठित उच्च स्तरीय जाँच समिति के 31 जनवरी 2020 के प्रतिवेदन के आलोक में दोषी पदाधिकारियों के विरूद्ध समुचित कार्रवाई करना है. उच्च स्तरीय जाँच समिति के प्रतिवेदन में पथ निर्माण विभाग से बुडको में प्रतिनियुक्त सूर्यकान्त, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-प्रभारी अधीक्षण अभियंता, बुडको,तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बुडको संजीव चौधरी और ओमप्रकाश सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बुडको (वर्तमान में सेवानिवृत) एवं अन्य अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी.
तीनों अभियंताओं को 14 फरवरी 2020 को किया गया था सस्पेंड
नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि सूर्यकान्त,संजीव चौधरी और ओमप्रकाश सिंह के खिलाफ निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही करने का निदेश है. इस आलोक में इन तीनों को 14 फऱवरी 2020 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
कार्यपालक पदाधिकारियों को मिली क्लिनचिट, इसी आधार पर इंजीनियर भी हुए बरी
पथ निर्माण विभाग द्वारा 28 जुलाई 2026 को जारी तीन अलग-अलग अधिसूचना में कहा गया है कि तीनों इंजीनियरों के लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा की गई. जिसमें पाया गया है कि वर्ष 2019 में पटना शहर में हुई जल जमाव की समस्या एक प्राकृतिक आपदा थी. जल-जमाव से विभिन्न प्रकार की सेवाएँ यथा विद्युत आपूर्ति आदि बाधित हुई, जिससे कई सम्प हाऊस जलजमाव के बाद क्रियाशील नहीं हो पायी। यह घटना प्राकृतिक आपदा जनित एवं परिस्थितिजन्य रही है। पटना जल-जमाव के मामले में उक्त परिस्थिति को देखते हुए सदृश्य मामले में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कतिपय कार्यपालक पदाधिकारियों को आरोप मुक्त किया गया है। ऐसे में अतिवृष्टि एवं सदृश्य मामले में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लिये गये निर्णय एवं आरोप पत्र में अंकित आरोप की समानता होने के मद्देनजर सूर्यकान्त, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-प्रभारी अधीक्षण अभियंता, बुडको, संजीव चौधरी और ओमप्रकाश सिंह जो सेवानिवृत हो चुके हैं. इन्हें आरोप मुक्त किया जाता है।