Parliament Monsoon Session: संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष और सरकार के बीच लगातार टकराव के चलते सत्र का अधिकांश हिस्सा हंगामे की भेंट चढ़ गया। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को समाप्त होना था।
लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष ने आसन पर बैठते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान में खड़े होने का आग्रह किया। आमतौर पर सत्र के समापन पर राष्ट्रगीत से पहले लोकसभा अध्यक्ष सदन की कार्य उत्पादकता और उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। ‘वंदे मातरम्’ के गायन के बाद उन्होंने सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई दलों के प्रमुख नेता और सांसद सदन में मौजूद रहे। राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। आखिरी दिन हंगामे के बीच राज्यसभा में करीब एक घंटे तक चर्चा हुई, जिसके बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दलों ने दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। पहला मुद्दा दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का था। विपक्ष ने पुलिस के लाठीचार्ज और कथित पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने और इस्तीफे की मांग की।
दूसरा बड़ा मुद्दा अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का रहा। विपक्ष ने इस मामले में भी सरकार से जवाब मांगा। दोनों मुद्दों को लेकर सदन में लगातार हंगामा और नारेबाजी होती रही, जिसके चलते कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
लगातार व्यवधान के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल ज्यादातर दिनों में सुचारू रूप से नहीं चल सके। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में निर्धारित कामकाज का करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 31 प्रतिशत ही हो सका। कई घंटे हंगामे की वजह से बर्बाद हुए।
हालांकि, हंगामे के बीच सरकार ने बहुमत के आधार पर कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए। इनमें एंटी-पेपर लीक बिल, टैक्सेशन संशोधन बिल, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला बिल, एमएसएमई संशोधन बिल और ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल समेत कई विधेयक शामिल रहे। इनमें से कई विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से पारित किए गए। वहीं, एफसीआरए संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक लंबित रह गए।
सरकार का कहना रहा कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। वहीं, विपक्ष ने सरकार पर जवाबदेही से बचने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से पीछे हटने का आरोप लगाया।
सत्र के अंतिम दिन से एक दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा की पेशकश भी की थी, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध समाप्त नहीं हो सका। आखिरी दिन भी सदन में हंगामा जारी रहा और अंततः दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
इसके साथ ही संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो गया। यह सत्र हाल के वर्षों के सबसे अधिक प्रभावित सत्रों में शामिल रहा, जिसमें हंगामे के बावजूद कई विधायी काम हुए, लेकिन व्यापक संसदीय बहस और सरकार की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी।