Bihar Politics: मोकामा विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने अनंत सिंह को सदस्यता खत्म करने के लिए विधानसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बीजेपी विधायक राजू सिंह का मामला उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से पूछा है कि जब राजू सिंह को चार साल की सजा हो चुकी है, तो उनकी सदस्यता को लेकर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पप्पू यादव ने इस पूरे मामले में विधानसभा की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अनंत सिंह की विधायिकी खत्म करने के लिए जल्दबाजी दिखाई जा रही है, जबकि राजू सिंह के मामले में कार्रवाई को लेकर अब तक स्पष्ट कदम सामने नहीं आया है।
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एक लाइव वीडियो में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह की सदस्यता खत्म करने के लिए तुरंत नोटिस जारी कर दिया गया, लेकिन चार साल की सजा पाने वाले बीजेपी विधायक राजू सिंह के मामले में विधानसभा की ओर से वैसी तत्परता नहीं दिखाई गई।
पप्पू यादव ने कहा कि उनकी विचारधारा अनंत सिंह से मेल नहीं खाती, लेकिन कार्रवाई सभी के मामलों में समान आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और बीजेपी नेतृत्व से सवाल किया कि आखिर अनंत सिंह की सदस्यता के मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने यह भी दावा किया कि नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ने के बाद उनकी सरकार बचाने में अनंत सिंह ने बीजेपी और जेडीयू की मदद की थी।
दरअसल, मोकामा विधायक अनंत सिंह को जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके बाद पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने आरोप लगाया कि विधान परिषद चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में वोट मांगे।
इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। फिलहाल उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पप्पू यादव का सवाल है कि जब राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?