DELHI:  बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को अपनी जान का डर सता रहा है. पप्पू ने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यादव ने अदालत में दायर याचिका में कहा है कि राम मंदिर चंदे की चोरी के आरोप को लेकर संसद के बाहर किए गए उनके नाटक के बाद से उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। यहां तक कि सार्वजनिक रूप से उनके सिर कलम करने की भी बात की जा रही है।



चंदा चोरी का मामला उठाने के बाद मिल रही धमकी

पप्पू यादव ने अदालत के समक्ष अपनी दलील में यह बात रखी है कि राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित गबन और चोरी के मुद्दे पर उन्होंने संसद भवन के बाहर एक नाटक (स्किट) प्रस्तुत किया था। इसी घटना के बाद से उनके खिलाफ धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। यादव का आरोप है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उनके खिलाफ खुलेआम मौत की धमकियां दी जा रही हैं तथा उनके सिर कलम करने की बातें भी कही जा रही हैं। इन सबके चलते उनकी जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।



2 अगस्त को हुआ था हमला

यादव ने अपनी याचिका में 2 अगस्त की घटना का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि 2 अगस्त को उनके आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर हमला किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए इस हमले ने उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। यादव का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान सुरक्षा पर्याप्त नहीं लग रही।



लोगों के बीच जाने में हो रही परेशानी

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि उनकी सुरक्षा को बढ़ाया जाए। उन्होंने अदालत से सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश देने की मांग की है ताकि उनकी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यादव ने अदालत में यह भी कहा है कि धमकियों और हमले के बाद वे सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने में भी उन्हें कठिनाई हो रही है।



इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद अब अदालत इस पर सुनवाई करेगी। पप्पू यादव बिहार से स्वतंत्र सांसद हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। राम मंदिर चंदे से जुड़े उनके नाटक ने पहले भी चर्चा पैदा की थी, लेकिन उसके बाद मिली धमकियों और 2 अगस्त के हमले ने सुरक्षा के मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।



अभी तक इस मामले में अदालत का कोई आदेश सामने नहीं आया है। यादव की याचिका पर आगे की सुनवाई का इंतजार है। सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर इस याचिका ने एक बार फिर सांसदों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।