बिहार में टॉप ब्यूरोक्रेसी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच पूर्व डीजीपी अभयानंद ने 1970 के अय्यर कमीशन की तर्ज पर नए जांच आयोग के गठन की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात 1960-70 के दशक से भी अधिक गंभीर हैं।
Bihar News: नीतीश राज में टॉप ब्यूरोक्रेसी के भ्रष्टाचार की खूब चर्चा हो रही है. नई सरकार ने हाल ही में करप्शन के आरोप में दो आईएएस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है. वहीं ब्यूरोक्रेसी के कई टॉप लोग निशाने पर हैं. इन सभी पर संगीन आरोप हैं. बताया जाता है कि नीतीश राज में टॉप लेवल के अधिकारियों ने विदेशों में अकूत संपत्ति अर्जित की है. ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि करप्शन के इस बड़े खेल में सिर्फ अफसर ही हैं या तब की सरकार में बैठे लोग भी शामिल हैं. इन सबके बीच 1960-70 के दशक में बिहार सरकार द्वारा गठित अय्यर कमीशन की चर्चा होने लगी है.
पूर्व डीजीपी ने अय्यर कमीशन की तरह आयोग गठन की जरूरत बताई
बिहार के चर्चित व ईमानदार आईपीएस अधिकारी व पूर्व डीजीपी अभयानंद, जिनकी पुलिस में व्यापक सुधार करने वाले अफसर के रूप में पहचान है, वर्तमान हालत पर बेहद चिंतित हैं. वे 1960 के दशक में सरकार द्वारा गठित अय्यर कमीशन की चर्चा करते हैं. कहते हैं, ''साठ के दशक में बिहार सरकार में ऊंचे पदों पर भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए अय्यर कमीशन का गठन किया गया था. इसके सार्थक परिणाम आए। वर्तमान परिस्थितियां गुणात्मक रूप से उस समय से अधिक खराब है. सरकार को गंभीरता से विचार करनी चाहिए।''
जस्टिस अय्यर आयोग के गठन की क्या थी वजह ?
अब सवाल है कि 1960 के दशक में ऐसी कौन सी वजह थी, जिसके कारण रिटायर्ड जस्टिस टी. एल. वेंकटरमा अय्यर कमीशन गठित की गई थी ? अय्यर कमीशन (Aiyar Commission) 1970 में बनी थी. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के. बी. सहाय (K. B. Sahay) और अन्य कांग्रेसी पूर्व मंत्रियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित एक प्रमुख जांच आयोग था। इसके अध्यक्ष जस्टिस टी. एल. वेंकटरमा अय्यर थे.
सोशलिस्ट सरकार ने बनाया था आयोग..पूर्व सीएम व मंत्रियों की भूमिका की हुई थी जांच
बता दें, 1967 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार हुई थी. कांग्रेस की हार की वजह सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार था. हार के बाद, बिहार में बनी गैर-कांग्रेसी (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी) सरकार ने इस आयोग का गठन किया था. अय्यर कमीशन ने पूर्व सीएम के. बी. सहाय और 5 अन्य वरिष्ठ पूर्व मंत्रियों पर पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और अपने करीबियों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों की जांच की थी. अय्यर कमीशन ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कुछ पूर्व मंत्रियों को कई मामलों में भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया था.