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बिहार में खत्म होगी शराबबंदी? सियासी उलटफेर के बीच मांझी ने फिर से उठा दी बड़ी मांग, कहा- नई सरकार में देखा जाएगा

Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने जेडीयू जॉइन कर ली है। पार्टी के मंत्री ने कहा कि राजनीति संभावना का खेल है और आगे देखना होगा कि उन्हें कौन सी जिम्मेदारी दी जाती है।

08-Mar-2026 03:42 PM

By FIRST BIHAR

Bihar Politics: बिहार में सियासी उलटफेर के बीच NDA में शामिल हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पटना पहुंचते ही एक बार फिर से शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठा दी। पटना एयरपोर्ट पर मीडियाकर्मियों ने जब उनसे सवाल पूछा कि क्या शराबबंदी खत्म होगी? तब मांझी इस सवाल को टाल गए और सिर्फ इतना कहा कि नई सरकार में देखा जाएगा।


दरअसल, बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से ही जीतन राम मांझी इसपर सवाल उठाते रहे हैं और सरकार में रहते हुए वह यह कहते रहे हैं कि इस कानून की आड़ में गरीबों को प्रताड़ित किया जा रहा है। मांझी कई बार कह चुके हैं कि अमीर लोग तो घरों में शराब पी रहे हैं तो उन्हें कोई नहीं पकड़ता लेकिन गरीब थोड़ा बहुत पी लेता है तो उसे पकड़कर जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने हमेशा से इस कानून में छूट देने की वकालत की है।


बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी उन्होंने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की थी। मांझी की मांग का समर्थन करते हुए उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक ने सदन में इसको लेकर सवाल उठाए थे। एनडीए में शामिल चिराग पासवान की पार्टी ने भी इस मांग का समर्थन किया। खुद पार्टी के सुप्रीमो चिराग पासवान ने भी कहा था कि शराबबंदी कानून की समीक्षा तो होनी ही चाहिए।


अब जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है और बिहार में मुख्यमंत्री के नए चेहरे की तलाश के साथ साथ नई सरकार के गठन की कवायद जारी है तो संभावना जताई जाने लगी है कि बिहार में शराबबंदी को खत्म किया जा सकता है। हालांकि सरकार के स्तर पर इसको लेकर किसी तरह का कोई बयान सामने नहीं आया है। सियासी उलटफेर के बीच पटना पहुंचे जीतन राम मांझी ने एक बार फिर से शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठा दी है।


पटना एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में जो गलतियां हो रही हैं उसको सुधारना चाहिए ताकि जो छह लाख मुकदमा है उसमें से तीन लाख मुकदमा गरीबों पर भी है और बहुत तरह से उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है। करोड़ों लीटर शराब बनाने वाला लोग बच जा रहा है और पाव भर शराब पीने वाले लोगों को पकड़ा जा रहा है। ऐसे में इस कानून की समीक्षा होनी चाहिए। जब मीडियाकर्मियों ने मांझी से पूछा कि क्या शराबबंदी खत्म होगी? तब उन्होंने कहा कि ये अलग बात है, नई सरकार आएगी तो देखा जाएगा।