Bihar Politics: नीट (यूजी) 2024 प्रश्नपत्र चोरी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया की संलिप्तता का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। इसी कारण एजेंसी ने उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया। सीबीआई के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और जांच एजेंसी पर निशाना साधा।



रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा, “रसूखदार 'संरक्षकों' को बेनकाब होने से बचाने के लिए मुख्य आरोपी को दी गयी क्लीन चिट ..नीट (NEET) पेपर लीक मामले में सीबीआई (CBI) के द्वारा मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को क्लीन चिट दिए जाने का निर्णय न केवल संदिग्ध है, बल्कि यह पूरी जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करता है।



यह बात किसी के गले नहीं उतर सकती कि संजीव मुखिया इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक का गोरखधंधा बिना उच्च राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के चला रहा था। सीबीआई के द्वारा उसे क्लीन चिट दिया जाना, इस सच्चाई की ओर सीधा इशारा है कि "जांच का मकसद निष्पक्ष न्याय करना नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे उन प्रभावशाली लोगों के नामों को उजागर होने से बचाना है जिन्होंने इस गोरखधंधे के नेटवर्क को छत्रछाया दी थी।"



सरकार को ये बताना चाहिए कि अगर संजीव मुखिया जैसे मुख्य सरगना को ही बेकसूर साबित कर दिया जाएगा, तो इस पूरे सिंडिकेट में शामिल बड़े नेताओं, अधिकारियों और बिचौलियों तक जांच का पहुंचना कैसे संभव हो पाएगा ? क्लीन चिट की यह जल्दबाजी मुख्य साजिशकर्ताओं - सरकार में शामिल संरक्षकों को बचाने की एक सोची-समझी रणनीति ही प्रतीत होती है।



सीबीआई की इस कार्रवाई से ये साफ़ है कि जांच एजेंसियां निष्पक्षता के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं, जिससे प्रतियोगी व् भर्ती प्रक्रियाओं - परीक्षाओं से छात्रों - युवाओं का भरोसा उठ रहा है।सीधे शब्दों में कहूँ तो संजीव मुखिया को मिली यह क्लीन चिट धांधली की तह तक जाने का प्रयास नहीं, बल्कि रसूखदार 'संरक्षकों' को बेनकाब होने से बचाने के लिए और जांच को रफा-दफा करने का एक प्रशासनिक प्रपंच है”।