Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए बिहार में हर वर्ष आने वाली बाढ़ को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि खासकर मिथिला और कोसी क्षेत्र के लोगों को हर साल बाढ़ की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। नेपाल में जब अधिक बारिश होती है, तो उसका सीधा असर बिहार पर पड़ता है। पिछले करीब 50 वर्षों से बिहार को बाढ़ से मुक्त करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नीतियां और परियोजनाएं बनाने की बात कही जा रही है, लेकिन कोसी से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना आज भी अटकी हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। भविष्य में व्यवस्था में आने पर वीआईपी बिहार को बाढ़ की समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए ठोस प्रयास करेगी। यूपी में लगातार हो रहे दौरे को लेकर मुकेश सहनी ने कहा कि उनकी पार्टी फिलहाल आंदोलन के माध्यम से गांव-गांव और घर-घर तक संकल्प अभियान पहुंचा रही है। नवंबर तक यह आंदोलन जारी रहेगा और आरक्षण के अधिकार की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।
उन्होंने कहा कि वह पहले से ही इंडिया ब्लॉक में हैं और समय आने पर गठबंधन को लेकर निर्णय लिया जाएगा। एनडीए में शामिल नेताओं को समाज के अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। यदि वे समय रहते आरक्षण के मुद्दे पर जनता के साथ लौटते हैं तो ठीक है, अन्यथा वीआईपी चुनावी राजनीति में उतरने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल के रूप में चुनाव लड़ना उनका लोकतांत्रिक दायित्व है और पार्टी इसके लिए लगातार संगठन को मजबूत कर रही है।
आरक्षण की समीक्षा को लेकर जारी बयानबाजी पर सहनी ने कहा कि यह अनावश्यक तनाव पैदा करने और समाज के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति है। बिहार में बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हैं और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। महिलाओं को दो लाख रुपये देने के वादे पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय आपस में विवाद खड़ा किया जा रहा है। सरकार को रोजगार, शिक्षा, पलायन और महिलाओं से जुड़े वादों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
चिराग पासवान को मिली कथित धमकी पर सहनी ने कहा कि सरकार को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और उनकी सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए। धमकी किसने दी और इसके पीछे क्या कारण है, इसकी जांच होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत होने के दावे पर भी उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि सरकार को देश की आर्थिक स्थिति पर स्पष्ट तस्वीर जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए और सरकार को महंगाई, रोजगार तथा आर्थिक चुनौतियों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि देश की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है और जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो फिर लोगों को सोना खरीदने और विदेश यात्रा करने से क्यों रोका जा रहा है। डॉलर की बढ़ती कीमत और आर्थिक चुनौतियां अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। सरकार को केवल आंकड़े बताने के बजाय रोजगार, महंगाई और आम लोगों की आय पर ध्यान देना चाहिए। विदेश यात्रा पर रोक जैसी परिस्थितियां देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े करती हैं।