Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा के क्रम में आगरा पहुंचने पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की ओर से मिले अभूतपूर्व जनसमर्थन के प्रति आभार जताया। आगरा में वीआईपी कार्यकर्ताओं ने हजारों की संख्या में बाइक रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान निषाद समाज ने एक स्वर में आरक्षण की मांग उठाते हुए संकल्प लिया कि जब तक निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिलता, तबतक भाजपा को वोट नहीं दिया जाएगा।



मुकेश सहनी ने कहा कि आगरा में उमड़ा जनसैलाब और युवाओं की बड़ी भागीदारी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि निषाद समाज अब अपने हक-अधिकार को लेकर जागरूक हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों से वे निषाद, मल्लाह, कश्यप, बिंद, केवट, बेलदार सहित समाज की विभिन्न उपजातियों को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीबी, पिछड़ेपन और भेदभाव के खिलाफ है।



वीआईपी प्रमुख ने कहा कि जब देश एक है, संविधान एक है और प्रधानमंत्री एक हैं, तो निषाद समाज के साथ राज्यों में अलग-अलग व्यवहार क्यों हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में निषाद समाज की विभिन्न उपजातियों को आरक्षण का लाभ मिल सकता है, तो उत्तर प्रदेश और बिहार में यह अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की मांग को लेकर उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक समाज को उसका अधिकार नहीं मिल जाता।



सहनी ने अपने संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं एक गरीब मछुआरा परिवार में पैदा हुए हैं। बचपन में गरीबी को करीब से देखा और 18 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर मुंबई जाकर मजदूरी की। उन्होंने कहा कि बेहतर जिंदगी मिलने के बाद भी जब उन्होंने अपने समाज की बदहाली देखी तो आराम की जिंदगी छोड़कर समाज के हक की लड़ाई में उतरने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज के गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।



मुकेश सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक है और जनता के पास सबसे बड़ी ताकत उसका वोट है। उन्होंने निषाद समाज से अपील की कि वह अपने वोट की ताकत को पहचाने और एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करे। उन्होंने कहा कि निषाद समाज की आबादी और राजनीतिक प्रभाव इतना है कि वह सरकार बनाने और सरकार बदलने की क्षमता रखता है।



उन्होंने कहा कि इसी राजनीतिक जागरूकता के लिए ‘निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा’ निकाली जा रही है। सहनी ने कहा कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण लागू नहीं किया गया, तो समाज को अपने वोट के माध्यम से जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि वोट किसे देना है, यह जनता अपने विवेक से तय करे, लेकिन आरक्षण नहीं देने वालों को वोट नहीं देने का संकल्प जरूर ले।



वीआईपी प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई सत्ता और पद के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए है। उन्होंने कहा कि मंत्री पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है। समाज का सम्मान और अधिकार सबसे बड़ा है। उन्होंने कहा कि बिहार में वीआईपी ने अपने संघर्ष के बल पर राजनीतिक ताकत दिखाई है और अब उत्तर प्रदेश में भी निषाद समाज को संगठित कर उसके अधिकार की लड़ाई को मजबूत किया जाएगा।



मुकेश सहनी ने कहा कि चुनाव के समय समाज को तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं। कभी पैसे बांटे जाते हैं, कभी जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगे जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रलोभन में न आएं और अपने बच्चों के भविष्य, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सम्मान को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक निर्णय लें।



उन्होंने कहा कि आज आगरा में युवाओं और कार्यकर्ताओं का जो उत्साह दिखाई दिया है, उसकी आवाज दिल्ली और लखनऊ तक जाएगी। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अब अपने अधिकार के लिए पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर समाज को जागरूक करें और आरक्षण के मुद्दे पर एकजुटता बनाए रखें।



मुकेश सहनी ने कहा कि, “संकल्प एक है, आवाज एक है—आरक्षण नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।” उन्होंने कहा कि यह संकल्प किसी व्यक्ति या पार्टी से नफरत के लिए नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार और आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए है। उन्होंने आगरा के कार्यकर्ताओं और आम लोगों द्वारा दिए गए समर्थन के लिए हृदय से आभार जताते हुए कहा कि निषाद आरक्षण की लड़ाई को अब और मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।