Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री और ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से चर्चित मुकेश सहनी मंगलवार को रायबरेली पहुंचे। उनके पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं, युवाओं, समर्थकों और निषाद समाज के लोगों ने जोरदार स्वागत किया। 



बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए और मुकेश सहनी के समर्थन में नारे लगाए। रायबरेली पहुंचने से पहले सहनी सोमवार को अमेठी में कार्यक्रम में शामिल हुए थे। रायबरेली में आयोजित कार्यक्रम के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता को भी संबोधित किया।



मुकेश सहनी ने कहा कि रायबरेली में पहली बार इस तरह कार्यक्रम में आने के बावजूद जिस बड़ी संख्या में समाज के लोग, युवा, माता-बहनें और पार्टी के शुभचिंतक जुटे हैं, वह समाज की जागरूकता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वे यहां वोट मांगने या चंदा लेने नहीं, बल्कि निषाद समाज को अपने अधिकारों के लिए खुद खड़ा होने का संदेश देने आए हैं।



उन्होंने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जन्म एक गरीब मछुआरा परिवार में हुआ। पिता और दादा मछली मारकर परिवार चलाते थे। 18 वर्ष की उम्र में वे मुंबई चले गए और मात्र 30 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी से अपनी जिंदगी की शुरुआत की। मेहनत और संघर्ष के बाद उन्होंने सफलता हासिल की, लेकिन जब वे बिहार लौटे तो देखा कि उनका समाज आज भी गरीबी, बेरोजगारी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। इसी के बाद उन्होंने अपना कारोबार छोड़कर समाज के हक और अधिकार की लड़ाई को अपना जीवन समर्पित किया।



सहनी ने कहा कि सिर्फ ‘सन ऑफ मल्लाह’ के संघर्ष करने से समाज की लड़ाई नहीं जीती जा सकती। निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप और बिंद समाज के लोगों को स्वयं अपने बच्चों के भविष्य के लिए लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि अब किसी नेता को अपना वकील बनाकर आंख बंद करके भरोसा करने का समय नहीं है। समाज को खुद अपनी वकालत करनी होगी, तभी कोई उसके वोट और अधिकार का सौदा नहीं कर सकेगा।



उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निषाद समाज के वोट को वर्षों से पैसे, टिकट और भावनाओं के जरिए प्रभावित किया जाता रहा है। अब समाज को यह तय करना होगा कि उसका वोट किसी कीमत पर नहीं बिकेगा। उन्होंने कहा कि उनका स्पष्ट नारा है—“आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं, गठबंधन नहीं तो वोट नहीं।”



मुकेश सहनी ने कहा कि 2027 से पहले निषाद समाज को एससी आरक्षण लागू नहीं किया गया तो समाज सत्ता को अपने वोट की ताकत का एहसास कराएगा। उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस सरकार और व्यवस्था से है जो समाज के अधिकार की फाइल को दबाकर बैठी है। मोदी हों या योगी, कोई भी व्यक्ति स्थायी नहीं है, लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठकर यदि समाज का काम नहीं होगा तो समाज को अपने वोट से जवाब देना होगा।



सहनी ने निषाद समाज से यूपी, बिहार और झारखंड में एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तीनों राज्यों का निषाद समाज एकजुट होगा, तब दिल्ली की सत्ता को उसकी ताकत का एहसास होगा। कार्यकर्ताओं से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कमेटियां बनाने और गांव-गांव जाकर आरक्षण के लिए संकल्प अभियान चलाने की अपील की।



उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को यह संकल्प लेना होगा कि “जब तक निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक वोट नहीं देंगे।” निषाद समाज के पास वोट की ऐसी ताकत है, जिससे वह सरकार बना भी सकता है और सत्ता से बाहर भी कर सकता है।



सहनी ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी निषाद समाज का कोई राष्ट्रीय नेता नहीं बन पाया है। समाज के लोगों से अपील की कि वे किसी नेता के पीछे आंख बंद करके चलने के बजाय अपनी राजनीतिक ताकत को पहचानें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में निषाद समाज अपना नेतृत्व खुद खड़ा करेगा और अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करेगा।