DESK: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसा चेहरा उभरकर सामने आया है, जिसकी कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल बन गई है। दूसरों के घरों में दाई का काम करने वाली कलिता मांझी अब माननीय बन गई हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की औसग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल कर सबको चौंका दिया है। दाई से विधायक बनीं कलिका मांझी आज विधायक बनने से काफी खुश हैं।  


घर-घर जाकर चौका बर्तन करने वाली बनीं माननीय

पश्चिम बंगाल की औसग्राम विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में बीजेपी ने घर-घर काम करने वाली महिला कलिता माझी को टिकट देकर सबको आशचर्यचकित कर दिया कि बीजेपी में कुछ भी संभव है। जिस तरह बिहार में बांकीपुर विधायक नितिन नबीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था, बीजेपी के इस कदम की भी उस वक्त खूब चर्चा हुई थी। आज कलिता मांझी को लेकर बीजेपी की चर्चा हो रही है। 


2500 रुपये महीने पर 4 घरों में करती थीं काम

कल तक जिन हाथों में दूसरों के घरों के जूठे बर्तन और झाड़ू-पोछा हुआ करता था, आज उन्हीं हाथों में औसग्राम की जनता ने अपनी तकदीर की चाबी सौंप दी है। बता दें कि मात्र 2,500 रुपये की मासिक पगार पर कलिता माझी 4 घरों में चौका बर्तन करती थी। कलिता ने गरीबी की बेड़ियां तोड़कर पश्चिम बंगाल विधानसभा तक का सफर तय किया और आज उसकी किस्मत बदल गयी। आज वो उस इलाके की विधायक बन गयी हैं। 


टीएमसी के उम्मीदवार को 12535 वोट से हराया

कलिता माझी औसग्राम से बीजेपी की कैंडिडेट बनाई गयी थी, जिनका सीधा मुकाबला ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी प्रसन्ना लोहार से था। कलिता ने प्रसन्ना को 12 हजार 535 वोटों से हराया दिया। कलिता की इस बड़ी जीत से टीएमसी भी हैरान रह गया। 


बीजेपी को मिली बड़ी सफलता 

औसग्राम सीट पर बीजेपी भारी वोटों के अंतर से जीत गयी। यह भाजपा के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 207 सीटों पर जीत हासिल की जबकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को सिर्फ 80 सीट ही मिल पाया। 


बर्धमान की रहने वाली हैं कलिता

हावड़ा से पहले बर्धवान जिले के गुसकुरा माछपुर पारा में एक छोटे से घर में कलिता मांझी रहती हैं। घर-घर दाई का काम कर वह अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करती थीं। पति, दो देवर और मां साथ वह रहती हैं। आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कलिता मांझी ने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। कलिता ने कभी नहीं सोचा था कि वो एक दिन विधायक बन जाएगी। लेकिन आज वह माननीय बन गयी हैं। कलिता के विधायक बनने से पूरा परिवार खूश है। 


2021 में भी चुनाव लड़ी थीं लेकिन हार गईं

कलिता कहती हैं कि 2014 में वह बीजेपी की बूथ एजेंट बनी थीं। 2019 में घुस्कुरा नगर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह नगर सचिव के पद पर थीं। जिसके बाद बीजेपी ने 2021 में उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया था। उस वक्त टीएमसी के अथेदानंद थंडर ने 11 हजार 815 वोट से मुझे हरा दिया था। तब बीजेपी ने 293 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन जीत 77 सीटों पर ही मिली थी।


लेकिन 2026 मिली बड़ी कामयाबी 

 2022 में वो वर्धमान की पार्टी सचिव बनाई गयी। 2025 में उन्हें पार्टी ने बोलपुर जिले का महासचिव बनाया। जिसके बाद 2026 में पार्टी ने फिर उन्हे से टिकट दिया और इस बार के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल हुई। अब वो विधायक बन गयी हैं। कलिता ने बताया कि जब दूसरी बार चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिला तब मैंने सात दिनों तक घर-घर जाकर काम करना काम किया। लेकिन नामांकन दाखिल करने के बाद यह काम छोड़ दिया क्योंकि चुनाव प्रचार के लिए समय देना जरूरी था। कलिता माझी की यह सफलता आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन हालात के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।