PATNA: ज्यादा दिनों की बात नहीं है जब बिहार में एनडीए में वही होता था जो नीतीश कुमार चाहते थे. लेकिन नीतीश के कमजोर पड़ने के बाद आज उनकी पार्टी जेडीयू की दुर्दशा उजागर हो गई. हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव को लेकर जेडीयू ने समीक्षा बैठक बुलाई थी. बैठक में पार्टी के उम्मीदवारों के साथ साथ दूसरे नेताओं ने खुल कर कहा कि विधान परिषद चुनाव में बीजेपी के नेताओं ने पीठ में खंजर मारा. लेकिन मंच पर बैठे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा से लेकर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की जुबान से एक शब्द नहीं निकला. 


जेडीयू में भारी उथलपुथल

दरअसल, हाल में ही बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव हुए हैं. इनमें जेडीयू ने बीजेपी से गठबंधन के तहत चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन पार्टी के तीन कैंडिडेट की हार हो गई. चुनाव परिणाम के बाद जेडीयू के दो उम्मीदवारों ने खुलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. छपरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के कैंडिडेट आनंद पुष्कर और मुजफ्फरपुर स्नातक क्षेत्र से जेडीयू उम्मीदवार अभिषेक झा ने सीधा आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं के भीतरघात के कारण उनकी हार हुई. 


बीजेपी ने जले पर नमक छिड़का

विधान परिषद चुनाव में जेडीयू की करारी हार के बाद बीजेपी ने उसके जले पर और नमक छिड़क दिया. छपरा में जेडीयू को हराने वाले राहुल राज और मुजफ्फरपुर में जदयू को हराने वाले वंशीधऱ ब्रजवासी को बीजेपी ने पार्टी में शामिल करा लिया. चुनाव परिणाम आने के एक सप्ताह के भीतर ही दोनों निर्दलीय विधान पार्षद बीजेपी में शामिल हो गये. 


बीजेपी के इस कदम से जेडीयू के भीतर और बौखलाहट मची. पार्टी के कई नेताओं ने बीजेपी पर सवाल उठाये. विधान परिषद चुनाव में कैंडिडेट रहे आनंद पुष्कर और अभिषेक झा ने इस पर क़ड़ी नाराजगी जतायी. दोनों का कहना था कि भाजपा ने चुनाव में जो भीतरघात किया था, वह खुलकर सामने आ गया. 


समीक्षा बैठक में क्या हुआ?

पार्टी के भीतर बौखलाहट को देखते हुए जेडीयू ने गुरूवार को विधान परिषद की समीक्षा बैठक बुलाई. इसमें पार्टी के उम्मीदवारों के साथ-साथ जिलाध्यक्षों और विधायकों को भी बुलाया गया. पार्टी की ओर से कहा गया कि चुनाव को लेकर अपने नेताओं-कार्यकर्ताओं की राय जानने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.


पहले से ही लीपापोती की कर ली गई थी तैयारी

जेडीयू के एक नेता ने बताया कि पार्टी को चला रहे संजय झा और उनकी कंपनी ने पहले से ही चुनाव में बीजेपी के भीतरघात पर लीपापोती करने की तैयारी कर ली थी. चुनाव में चोट खाये कैंडिडेट खामोश रहें, इसके लिए रास्ता निकाल लिया गया था. विधान परिषद चुनाव में जेडीयू के उम्मीदवार रहे नेताओं को कहा गया था कि वे बैठक में कुछ बोलने के बजाय जो शिकायत है, उसे लिख कर दे दें. पार्टी उस पर उचित कार्रवाई करेगी. 


जेडीयू नेतृत्व के इस फऱमान के बाद पार्टी उम्मीदवारों ने समझ लिया था कि आगे क्या होना है. पार्टी के एक सीनियर नेता ने बताया कि सिर्फ एक उम्मीदवार आनंद पुष्कर ने अपनी शिकायतों को लिख कर दिया. उन्होंने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन कर बैठक में खुल कर ये बताया कि चुनाव में उनके साथ क्या हुआ. उन्होंने खुल कर कहा कि बीजेपी के दो सांसदों और कुछ विधायकों ने उन्हें चुनाव हरवाया है. 


लेकिन बाकी उम्मीदवारों ने चुप्पी साध ली. उन्होंने ना तो कुछ लिख कर दिया और ना ही बैठक में खुलकर कुछ कहा. मुजफ्फरपुर से उम्मीदवार रहे अभिषेक झा और पटना स्नातक से जीतने वाले नीरज कुमार ने चंद शब्दों में अपनी बातों को समाप्त कर दिया, दोनों ने बीजेपी या अपनी ही पार्टी के किसी दूसरे नेता के खिलाफ बोलने से परहेज किया. 


चुप्पी साधे रहे संजय झा 

बैठक में मौजूद एक जेडीयू नेता ने बताया कि बीजेपी के खिलाफ लगने वाले आरोपों पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा से लेकर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा चुप्पी साधे रहे. दोनों ने सिर्फ इतना कहा कि पार्टी नेताओं की शिकायतें सुन ली गई हैं. आगे उचित कार्रवाई होगी. लेकिन किसी ने बीजेपी के बारे में कोई चर्चा नहीं की. 


उमेश कुशवाहा के बयान से हैरानी

जेडीयू के कई नेताओं को बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के बयान पर हैरानी हुई. समीक्षा बैठक में ये आऱोप लगा कि बीजेपी के नेताओं ने भीतरघात किया. बीजेपी ने जेडीयू को हराने वालों को पार्टी में शामिल करा कर जले पर नमक छिड़का. बैठख में इन तमाम बातों पर चर्चा हुई. लेकिन इसके बाद उमेश कुशवाहा ने ये बयान दे दिया कि जेडीयू का बीजेपी के साथ फेवीकोल वाला जोड़ है औऱ ये जोड़ यानि गठबंधन टूटने वाला नहीं है.


गैरहाजिर रहे बड़े नेता 

वैसे इस समीक्षा बैठक पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे. इस बैठक में ना तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार मौजूद थे औऱ ना ही उनके उत्तराधिकारी बताये जा रहे निशांत कुमार. पार्टी में नंबर टू की हैसियत रखने वाले केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी बैठक से गैरहाजिर थे. फिर बीजेपी के खिलाफ बोलने की हिम्मत किसमें थी.

जेडीयू के एक नेता  ने बताया कि बीजेपी से जेडीयू में आये संजय झा अपने राजनीतिक जीवन में कोई आम चुनाव नहीं जीते हैं. उनसे ये कैसे उम्मीद लगाई जा सकती है कि वे भाजपा के खिलाफ बोलेंगे या कोई स्टैंड लेंगे. हकीकत तो ये है कि संजय झा के नेतृत्व में जेडीयू पूरी तरह से बीजेपी की पिछलग्गु बन गई है. इससे पार्टी के वोटर औऱ कैडर दोनों टूट रहे हैं. अगर ऐसे ही हालात रहे तो फिर पार्टी का भगवान ही मालिक है.

ब्यूरो रिपोर्ट, पटना, फर्स्ट बिहार/झारखंड