Bihar Politics: केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह से जुड़े चर्चित "दो गज जमीन" बयान मामले में सोमवार को बेगूसराय व्यवहार न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। एमपी-एमएलए कोर्ट के एसीजेएम प्रथम की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पूर्व से प्रभावी अग्रिम जमानत (प्री-अरेस्ट बेल) को बरकरार रखते हुए केंद्रीय मंत्री को राहत जारी रखी। वहीं, प्रत्येक सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से स्थायी छूट देने के लिए दायर धारा-205 के आवेदन पर अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
सोमवार को एक दिवसीय बेगूसराय दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह स्वयं न्यायालय पहुंचे और मामले की सुनवाई में भाग लिया। अदालत में उनके अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए जमानत को यथावत रखने तथा व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान करने की मांग की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पूर्व से प्रभावी जमानत को जारी रखने का आदेश दिया, जबकि धारा-205 के आवेदन पर फैसला बाद में सुनाने की बात कही।
सुनवाई के बाद न्यायालय परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना के तहत मामला दर्ज कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने राजनीतिक द्वेष के आधार पर आचार संहिता के तहत उन पर ऐसी धाराएं लगाई गईं, मानो वे कोई आतंकवादी हों। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत ने पहले भी उन्हें राहत दी थी तथा आज भी न्याय मिला है। इसके लिए उन्होंने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया।
मामले की पैरवी कर रहे भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जिला मुख्यालय स्थित जीडी कॉलेज परिसर में आयोजित एक सभा में दिए गए भाषण को लेकर गिरिराज सिंह के खिलाफ धार्मिक विद्वेष फैलाने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी राहुल कुमार के निर्देश पर तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा नगर थाना कांड संख्या-221/2019 दर्ज कराया गया था।
अधिवक्ता ने बताया कि इतने वर्षों के बाद भी अभियोजन पक्ष की ओर से कोई ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। कथित भाषण की न तो कोई प्रमाणिक वॉयस रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई गई है और न ही मामले से संबंधित कोई सीजर लिस्ट रिकॉर्ड पर लाई गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों के अभाव में मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गिरिराज सिंह देश के केंद्रीय मंत्री हैं और अनेक प्रशासनिक एवं सरकारी दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इसके बावजूद उन्होंने न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए स्वयं अदालत में उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया में सहयोग किया। इसी कारण उनकी ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-205 के तहत आवेदन दाखिल कर व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट देने का अनुरोध किया गया है। सोमवार की सुनवाई मुख्य रूप से इसी आवेदन को लेकर थी, जिस पर अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।
बता दें कि यह पूरा मामला 6 अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए चर्चित "दो गज जमीन" बयान से जुड़ा है। उस समय इस बयान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी विवाद हुआ था तथा बाद में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान मूल केस डायरी के गायब होने का मुद्दा भी लगातार चर्चा में बना हुआ है, जिसे लेकर पहले भी अदालत में सवाल उठाए जा चुके हैं।
फिलहाल अदालत द्वारा अग्रिम जमानत की राहत बरकरार रखे जाने से गिरिराज सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। वहीं, धारा-205 के आवेदन पर आने वाला न्यायालय का आदेश इस मामले की आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें अदालत के अगले आदेश और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।