Bihar News: मगध के भूमिहार नेताओं को सिर्फ जेडीयू ने सम्मान दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी शाहाबाद-मगध इलाके से जीते विधायकों को मंत्री पद से वंचित करते आई है. इस क्षेत्र के भूमिहारों ने ही सबसे ज्यादा राजद के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. बिहार में भाजपा को स्थापित करने में जी-जान लगाया है. 2005 से अब तक नीतीश कुमार ने मगध के दो भूमिहार नेताओं को मंत्री बनाया, जबकि भाजपा ने मगध के भूमिहार विधायकों को पावर से दूर रखा है. इस बार भी बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने मगध-शाहाबाद से जीते भूमिहार विधायक, जो दूसरे से कम नहीं, उन्हें मंत्रिमंडल से पूरी तरह से अलग रखा है. इससे इन भूमिहार विधायकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
नीतीश कैबिनेट में मगध के 2 नेता ही मंत्री बने....
बिहार में 2005 में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने. तब नीतीश कुमार ने मगध के धाकड़ नेता रामाश्रय प्रसाद सिंह को मंत्री बनाया था. नीतीश कुमार ने रामाश्रय प्रसाद सिंह को जल संसाधन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी थी. ये 2008 तक जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री रहे. इसके बाद ऊर्जा विभाग एवं संसदीय कार्य मंत्री बनाया गया. इतना ही नहीं जेडीयू नेता रामाश्रय प्रसाद सिंह को सत्तारूढ़ दल के उपनेता भी बनाया गया था. जनवरी 2013 में इनका निधन हो गया. रामाश्रय बाबू के अलावे नीतीश कैबिनेट में मगध से जीत कर आए जेडीयू के दूसरे विधायक अनिल कुमार (भूमिहार) भी मंत्री बने थे. इन्हें विज्ञान प्रावैधिकी विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया था. इन दो भूमिहार विधायकों के अलावे किसी अन्य विधायक को मंत्री बनने का सौभाग्य अबतक नहीं मिला है.
मगध-शाहाबाद से कई विधायक जीते हैं
मगध क्षेत्र में नवादा,शेखपुरा,नालंदा के अलावे गया,जहानाबाद, अरवल,पटना,औरंगाबाद आता है. इसके अलावे शाहाबाद क्षेत्र में सासाराम-कैमूर और भोजपुर जिला है. 2005 से लेकर 2025 की अवधि में इन इलाकों से कई भूमिहार विधायक जीते. खासकर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर. इस बार भी हिसुआ,अरवल,बिक्रम और तरारी विस सीट पर भाजपा के भूमिहार विधायक हैं.
2010 में नीतीश कैबिनेट में जेडीयू से विजय चौधरी और पीके ठाकुर तो भाजपा कोटे से चंद्रमोहन राय(चंपारण) और गिरिराज सिंह(लखीसराय) मंत्री बने थे.2013 में भाजपा का जेडीयू से गठबंधन टूट गया. 2017 में एक बार फिर से भाजपा-जेडीयू का गठबंधन हुआ। तब नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे से सुरेश कुमार शर्मा( मुजफ्फरपुर) और विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय) मंत्री बने. 2020 में नीतीश कैबिनेट में भाजपा से जीवेश कुमार(दरभंगा) मंत्री बने. वहीं विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय) विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए. 2024 में नीतीश कैबिनेट में जहां विजय कुमार सिन्हा(लखीसराय) उप मुख्यमंत्री बनाए गए. फरवरी 2025 में जीवेश कुमार (दरभंगा) मंत्री बनाए गए. नवबंर 2025 में जब नीतीश सरकार का गठन हुआ तब विजय सिन्हा (लखीसराय) उप मुख्यमंत्री बने. 2026 में सम्राट सरकार में विजय सिन्हा (लखीसराय) और ई. शैलेन्द्र (भागलपुर) भाजपा कोटे में भूमिहार जाति के विधायक मंत्री बनाए गए हैं.
अनिल सिंह चार बार के हैं विधायक
ऐसा नहीं कि मगध-शाहाबाद में भूमिहार विधायकों की संख्या कम है. कई विधायक हैं जो लगातार चुनाव जीत रहे हैं. नवादा के हिसुआ से विधायक अनिल कुमार चौथी बार चुनाव जीते हैं. ये 2005 में पहली बार कांग्रेस के गढ़ में भाजपा का परचम लहराया था. तब से 2020 तक लगातार विधायक रहे. 2020 में चुनाव हारने के बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से भाजपा का विजय पताखा फहराया. मगध के इलाके से चार चुनाव जीतने वाले विधायक को भी भाजपा ने सम्मान नहीं दिया. वहीं, नवादा के भूमिहार बहुल वारिसलीगंज सीट से भाजपा के टिकट पर लगातार चुनाव जीत रही अखिलेश सिंह की पत्नी अरूणा देवी इस बार चुनाव हार गई हैं.
मनोज शर्मा ने अरवल में कमल खिलाया....
भूमिहार जाति से आने वाले विधायक हैं मनोज शर्मा. इस बार ये अरवल जैसी टफ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का कमल खिलाया है. इसके पहले मनोज शर्मा 2025 में गोह विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. ये पढ़े-लिखे और समझदार विधायक माने जाते हैं. भाजपा ने मगध से आने वाले इन पर भी भरोसा नहीं जताया.
सुनील पांडेय के पुत्र विशाल प्रशांत ने माले को चारो खाने चित्त किया
शाहाबाद इलाके से चुनाव जीतने वाले सुनील पांडेय के पुत्र विशाल प्रशांत ने 2024 के उप चुनाव में तरासी सीट से भाजपा का कमल खिलाया. विधानसभा चुनाव 2025 में भी इन्होंने तरारी सीट को सुरक्षित रखा. विशाल प्रशांत पढ़े-लिखे और समझदार हैं. बता दें, भाजपा ने कई नए विधायकों को मंत्री पद से नवाजा है.
बिक्रम पर भी भाजपा के भूमिहार विधायक का कब्जा
पटना से सटे बिक्रम विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं सिद्धार्थ सौरभ. इन्होंने 2015 और 2020 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और जीता. 2024 में ये पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए। 2025 के चुनाव में भाजपा ने सिद्धार्थ सौरभ को बिक्रम से उम्मीदवार बनाया और तीसरी बार जीत दर्ज की. मगध से आने वाले भाजपा विधायक सिद्धार्थ पर भी भाजपा ने भरोसा नहीं किया.
वैसे, मगध क्षेत्र से एनडीए के दो और भूमिहार विधायक हैं. एक हैं घोषी से जेडीयू विधायक ऋतुराज और दूसरे हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के टिकट पर अतरी सीट से रोमित कुमार विधायक हैं.
मगध-शाहाबाद क्षेत्र के भूमिहार विधायकों को मंत्री पद की रेस से बाहर किए जाने के बाद इनलोगों में भारी नाराजगी है. जब हमने बात की, तो गुस्सा फूट पड़ा. एक ने कहा कि हमारा कसूर क्या है. हमलोगों ने भाजपा की नींव मजबूत करने में किसी से कम कंधा दिया है क्या, हमलोगों ने राजद के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी. फिर भी पार्टी द्वारा सम्मान नहीं. वैसे वे पार्टी के सच्चे सिपाही हैं, पार्टी के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं.