नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को और मजबूत करने के लिए अपने अलग-अलग मोर्चों के प्रभारियों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने युवा, महिला, अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), किसान, अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। बीजेपी के इस संगठनात्मक फैसले को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की गतिविधियों को और मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी की ओर से जारी जिम्मेदारियों के मुताबिक हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। युवा मोर्चा बीजेपी के संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और पार्टी के कार्यक्रमों को युवाओं तक पहुंचाने में इसकी बड़ी भूमिका रहती है। हरीश द्विवेदी के सामने युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, संगठन से नए युवाओं को जोड़ने और युवाओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

वहीं डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। बीजेपी महिला मोर्चा के जरिए महिला कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उठाती है। ऐसे में डी. पुरंदेश्वरी को मिली यह जिम्मेदारी संगठन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महिला मोर्चा के जरिए पार्टी महिला मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश करेगी।

संजय भाटिया को एससी मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। अनुसूचित जाति समुदाय के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने और संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने में एससी मोर्चे की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। नई जिम्मेदारी के साथ संजय भाटिया के सामने इस वर्ग के बीच पार्टी के संपर्क और संवाद को और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी।

इसी क्रम में वैजयंत पांडा को ओबीसी मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक आधार माना जाता है। ऐसे में ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी पार्टी की संगठनात्मक और सामाजिक रणनीति के लिहाज से अहम है। वैजयंत पांडा के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग के बीच पार्टी के कार्यक्रमों और नीतियों को पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

बीजेपी ने लाल सिंह आर्या को किसान मोर्चा का प्रभारी बनाया है। किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहते हैं। ऐसे में किसान मोर्चे की जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी की कोशिश किसानों के बीच संगठन को और मजबूत करने की होगी। किसान मोर्चा के माध्यम से कृषि, किसानों की आय, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

वहीं सतीश पूनिया को एसटी मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। अनुसूचित जनजाति समुदाय के बीच पार्टी की संगठनात्मक मौजूदगी मजबूत करना इस मोर्चे की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा। आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के जनसंपर्क और संगठन विस्तार को लेकर यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके अलावा गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संगठनात्मक संवाद और संपर्क बढ़ाने की दिशा में यह जिम्मेदारी अहम होगी। अल्पसंख्यक मोर्चे के जरिए पार्टी अपने कार्यक्रमों और नीतियों को इस वर्ग तक पहुंचाने की कोशिश करेगी।

बीजेपी में अलग-अलग मोर्चे पार्टी के जमीनी संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। चुनावी तैयारियों के अलावा सदस्यता अभियान, जनसंपर्क, सामाजिक संपर्क अभियान और केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में इनकी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में नए प्रभारियों की नियुक्ति के बाद इन मोर्चों की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

बीजेपी के इस फैसले से साफ है कि पार्टी संगठन के स्तर पर अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। अब इन नेताओं के सामने अपने-अपने मोर्चों को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी के संगठनात्मक अभियानों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में इन मोर्चों की गतिविधियां बीजेपी की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती हैं।