Bihar News: बिहार विधान परिषद में बड़ा खेल हुआ है. नियुक्ति प्रक्रिया की वजह से परिषद सचिवालय सवालों के घेरे में खड़ा है. सफल अभ्यर्थियों को पहले ज्वाइन कराया गया,डेढ़ महीने बाद 64 में केवल 7 नव नियुक्त निजी सहायकों को रि-एक्जाम देने का नोटिस जारी किया गया. इसके बाद विवाद और बढ़ गया है. विधान परिषद के अधिकारी नवनियुक्त निजी सहायकों से 4 नवंबर को रि-एक्जाम लेने वाले थे. इधर, मामला पटना हाईकोर्ट पहुंच गया. रि-एक्जाम से पहले पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने विधान परिषद को पूरे मामले में हलफनामा देने का आदेश दिया है. 


बिहार में अजब-गजब का खेल चल रहा. विधान परिषद की बहाली प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं. पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई बहाली पर नए कार्यकारी सभापति ने सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, अवधेश नाराय़ण सिंह के कार्यकाल में विधान परिषद सचिवालय में 64 पदों पर बहाली को लेकर विज्ञापन जारी हुआ था. बिहार विधान परिषद सचिवालय ने 26 नवंबर 2025 को विज्ञापन सं- 2/25 जारी किया था. जिसमें कुल 64 विभिन्न पदों पर नियुक्ति किया जाना था. इनमें निजी सहायक के 7 पद, आशुलिपिक का 12, डाटा इंट्री ऑपरेटर का 35 और निम्न वर्गीय लिपिक का 10 पद शामिल था.


बहाली प्रक्रिया पूर्ण हो गई। इसके बाद सितंबर 2026 में ही तत्कालानी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे दिया. नियुक्ति पत्र मिलने के बाद नव नियुक्त अभ्यर्थियों ने परिषद सचिवालय में ज्वाइन भी कर लिया. जिन सात निजी सहायकों को लेकर विवाद गहराया है, उन सभी ने 10-12 सितंबर को ही परिषद सचिवालय में ज्वाइन कर लिया है. बताया जाता है कि, आज तक सभी नव नियुक्त निजी सहायक परिषद कार्यालय में अपनी उपस्थिति बना रहे हैं.


बिहार विधान परिषद में नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सत्ता बदल गई. अवधेश नारायण सिंह की सभापति पद से छुट्टी हो गई. पावर उप सभापति व वर्तमान कार्यवाहक सभापति रामवचन राय के पास पहुंच गई है. इसी बीच विधान परिषद सचिवालय ने 22 अक्टूबर को नोटिस जारी किया. नोटिस जारी करते ही विवाद खड़ा हो गया है. विधान परिषद में जिन 64 पदों पर हाल में बहाली प्रक्रिया पूर्ण हुई है, उनमें सिर्फ सात नव चयनित अभ्यर्थियों पर सवाल खड़े किए गए हैं। जबकि बहाली 64 लोगों की हुई. इनमें केवल सात नव नियुक्त निजी सहायकों को रि-एक्जाम देने का फऱमान जारी किया गया. जबकि 10 आशुलिपिक, 35 डाटा इंट्री ऑपरेटर और 10 निम्न वर्गीय लिपिक का चयन किया गया था. इन सभी पर परिषद सचिवालय चुप है. सिर्फ निजी सहायकों की नियुक्ति को कटघरे में खड़ा किया गया है. आशुलिपिक, डाटा इंट्री ऑपरेटर और निम्न वर्गीय लिपिक को रि-एक्जाम से अलग रखना, अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. 

सवाल यहीं से शुरू होता है, निजी सहायक की नियुक्ति की निष्पक्षता पर परिषद सचिवालय को भरोसा क्यों नहीं ? क्या इन निजी सहायकों की नियुक्ति के खिलाफ कंप्लेन हुआ ? एक ही विज्ञापन में सभी 64 पदों पर नियुक्ति हुई, जब पूरी बहाली प्रक्रिया में ही सेंध लगी, तो सिर्फ निजी सहायकों की बहाली पर सवाल क्यों, बहाली प्रक्रिया दोषपूर्ण है तो फिर जिम्मेदारों पर किस तरह की कार्रवाई होगी ? क्या नव चयनित आशुलिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर और लिपिकों की बहाली की भी जांच होगी, उन सभी से भी रि-एक्जाम लिया जाएगा ? इन सवालों का जवाब परिषद सचिवालय को देना होगा. 

बिहार विधान परिषद में जब खेल शुरू हुआ, एक ही विज्ञापन में 64 पदों पर बहाली, पर रि-एक्जाम सिर्फ सात निजी सहायकों के लेने का आदेश जारी हुआ, इसके बाद मामला पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है. नव नियुक्त स्पृहा सिंह व अन्य छह लोगों ने पटना हाईकोर्ट में सीडब्लूजेसी सं-16927/2026 दायर किया है. जिसमें विधान परिषद सचिवालय के सचिव को पार्टी बनाया गया है. निजी सहायक पद पर चयन होने के बाद ज्वाइन करने वाले नवनियुक्त अभ्यर्थियों ने विधान परिषद के 22 अक्टूबर 2026 को उस आदेश को चैलेंज दिया है.जिसमें 4 नवबंर 2026 को रि-एक्जाम देने का आदेश दिया गया था. कोर्ट में पिटिशन डालने के बाद 3 नवंबर 2026 को इस मामले की सुनवाई हुई। न्यायालय ने बिहार विधान परिषद को काउंटर एविडिविट दाखिल करने को कहा है इस मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर 2026 को होगी. 

बता दें, बिहार विधान परिषद ने 7 सितंबर 2026 को ही विज्ञापन सं- 2/25 के अंतर्गत आप्त सचिव संवर्ग में सात स्थायी पदों पर नियुक्त किया था. ये अभ्यर्थी हैं स्पृहा सिंह, अमन कुमार, नमन राज, अंजली कुमारी आनंद, सुमित राज ,गुडिया कुमारी और शिमरण भारती. नियुक्ति पत्र मिलने के बाद सभी सफल अभ्यर्थियों ने 12 सितंबर 2026 को ही विधान परिषद सचिवालय में ज्वाइन किया है.