Bihar News: बिहार प्रशासनिक सेवा के अफसरों का ऐसा दबदबा कायम है कि दूसरे विभाग के अधिकारी सड़क पर आ गए हैं. विभागीय प्रोन्नति तो मिली पर पद नहीं. हालात ऐसे हैं कि प्रमोशन पाए अधिकांश अधिकारी संकट में खड़े हैं. वे न घर के हैं और न घाट के. जबकि सरकार ने बिप्रसे के लिए सीट रिजर्व कर रखा है. इसके बाद भी परिवहन विभाग में विभागीय कैडर के अफसर के होने के बाद भी 37 जिलों में डीटीओ पद पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कब्जा है.  

सामान्य प्रशासन विभाग ने 2018 में ही जारी किया था पत्र 

सामान्य प्रशसान विभाग ने 30 मई 2018 को संकल्प जारी किया था. जिसमें बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग के पुनर्गठन एवं सेवा संवर्ग में पदों की संख्या और संरचना निर्धारित की गई थी. पुनर्गगठन के फलस्वरूप बिहार प्रशासनिक सेवा के कुल पदाधिकारियों के कुल पदों की संख्या 1634 कर दी गई। जिसमें संवर्गीय पदों की संख्या 1257,प्रतिनियुर्ति के आधार पर सुरक्षित पदों की संख्या-377 रखी गई। इमें मूल कोटि एसडीओ व वरीय उसमाहर्ता स्तर के 727 पद, उप सचिव स्तर के 339 पद ,अपर समाहर्ता स्तर के 304 पद, संयुक्त सचिव स्तर के 192 पद, अपर सचिव स्तर के 48, विशेष सचिव स्तर के 24 पद रखा गया. इसके अतिरिक्त सरकार ने 22 मई 2018 को मूल कोटि, उप सचिव, अपर समाहर्ता तथा संयुक्त सचिव स्तर के कुल 484 अतिरिक्त पदों का सृजन किया था.  

GAD ने बिप्रसे के 17 अफसरों के लिए 17 डीटीओ का पद किया है रिजर्व 

 सामान्य प्रशासन विभाग ने यह भी तय कर दिया कि किस विभाग में बिहार प्रशासनिक सेवा के कितने अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाएँगे. विभाग की अनुसूची ख में स्पष्ट किया गया है कि परिवहन विभाग में बिहार प्रशासनिक सेवा के उप सचिव स्तर एवं समकक्ष स्तर के कितने अधिकारी होंगे. परिवहन विभाग में मुख्यालय स्तर पर उप सचिव स्तर के 1 अधिकारी होगें. इसके अलावे उप परिवहन आयुक्त (मुख्यालय) स्तर के 1 और जिला परिवहन पदाधिकारी के 17 अधिकारी होंगे. अनुसूची ग में अपर समाहर्ता एवं समकक्ष स्तर के सभी प्रमडलों में संयुक्त आयुक्त सह सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के 9 पद बिप्रसे के अधिकारी से भरे जाएंगे. संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी विभाग के स्तर पर होंगे. 

परिवहन विभाग ने 2020 में जारी किया था अधिसूचना 

इसके बाद परिवहन विभाग ने 29 जनवरी 2020 को अधिसूचना जारी किया. जिसके तहत परिवहन कैडर का गठन हुआ। विभाग के तत्कालीन सचिव संजय कुमार अग्रवाल के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में बिहार परिवहन सेवा का गठन ,भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों का उल्लेख है. परिवहन विभाग की अधिसूचना में सामान्य प्रशासन विभाग के उस पत्र को पुष्ट किया गया है. परिवहन विभाग की अधिसूचना में जिक्र किया गया है कि जिला परिवहन पदाधिकारी के 17 पद, उप परिवहन आयुक्त का 1 पद एवं संयुक्त परिवहन आयुक्त का 2 पद पूर्व की तरह बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के लिए रिजर्व रहेगा. 

परिवहन विभाग के पास 19 डीटीओ,फिर भी बिप्रसे के अधिकारियों का डीटीओ पर कब्जा

बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए चिन्हित पदों को छोड़कर शेष पदों पर भी तब तक इस संवर्ग (बिप्रसे) के पदाधिकारियों से भरा जायेगा जब तक कि नियुक्ति या प्रोन्नति से परिवहन सेवा के अधिकारी पर्याप्त संख्या में न हो जाएं. यानि परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि अगर हमारे पास पर्याप्त संख्या में परिवहन सेवा के अधिकारी हो जाएंगे तब 17 पद को छोड़कर अन्य जिलों में डीटीओ की पोस्टिंग कर सकेंगे.  

अप्रैल 2026 में ही विभागीय कैडर वाले 19 अफसर बने हैं डीटीओ

यह इंतजार भी 2026 में खत्म हो गया. परिवहन विभाग ने 6 अप्रैल 2026 को परिवहन सेवा के 17 अफसरों को जिला परिवहन पदाधिकारी व समकक्ष पद पर प्रोन्नति दिया. इनमें 12 को एडीटीओ से डीटीओ में, जबकि पांच को मोटरयान निरीक्षक से जिला परिवहन पदाधिकारी में प्रोन्नति दी गई. जबकि, परिवहन विभाग विभागीय कैडर के 2 अधिकारी को पूर्व में ही डीटीओ के पद पर प्रोन्नति दे रखा है. वर्तमान में परिवहन विभाग के पास जिला परिवहन पदाधिकारी व समकक्ष स्तर के 19 विभागीय अधिकारी मौजूद हैं. इसके बाद भी स्थिति ऐसी है कि, 19 में 1 को छोड़ दें तो सारे के सारे विभागीय कैडर वाले वेटिंग फॉर पोस्टिंग हैं या फिर पुराने पोस्ट पर ही काम कर रहे.  

वर्तमान में 37 जिलों में बिप्रसे के अफसरों का है कब्जा

परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में सूबे 31 जिलों में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बतौर जिला परिवहन पदाधिकारी कार्यरत्त हैं. इनमें 5 अफसरों को दूसरे जिले के डीटीओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इस तरह से सूबे के 38 जिलों में 37 पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कब्जा है. सिर्फ एक जिला में बिहार परिवहन सेवा के अधिकारी बतौर डीटीओ पदस्थापित हैं.  

परिवहन सेवा वाले डीटीओ न घर के हैं न घाट के

बता दें, परिवहन सेवा के 17 अफसरों को डीटीओ व समकक्ष के रूप में तीन महीने पहले ही प्रोन्नति दी गई। लेकिन आज तक नया जगह नहीं मिला. ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे प्रमोशन से क्या फायदा..जब सभी को पुराने पद पर ही काम करना पड़े. नए जगह और नए पद पर पोस्टिंग नहीं होने का साइड-इफेक्ट ऐसा हुआ है कि उक्त पद पर दूसरे अधिकारी (एडीटीओ) की पोस्टिंग कर दी गई और उन्हें मुख्यालय में योगदान करने का आदेश जारी कर दिया गया.