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धर्मसंकट में आरजेडी और कांग्रेस, राज्यसभा चुनाव में गच्चा देने वाले विधायकों पर क्यों नहीं हो रहा एक्शन?

Bihar Politics: बिहार राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर महागठबंधन को बड़ा झटका दिया। विधायकों की अनुपस्थिति और क्रॉस वोटिंग के चलते राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में अंदरूनी विवाद गहरा गया है।

21-Mar-2026 01:04 PM

By FIRST BIHAR

Bihar Politics: बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप कर लिया, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के पीछे विधायकों की अनुपस्थिति और संभावित क्रॉस वोटिंग को बड़ी वजह माना जा रहा है, जिससे गठबंधन में अंदरूनी कलह तेज हो गई है।


बागी विधायकों पर कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने बताया कि राज्यसभा चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता, फिर भी गैर-हाजिर विधायकों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद पार्टी नेतृत्व आगे की कार्रवाई तय करेगा।


कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों सुरेंद्र मेहता (वाल्मीकिनगर), मनोज विश्वास (फारबिसगंज) और मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी) को कारण बताओ नोटिस भेजा है। हालांकि पार्टी के अंदर यह भी आशंका है कि कड़ी कार्रवाई से विधानसभा में पार्टी की ताकत और कमजोर हो सकती है।


रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि ये विधायक पार्टी के मूल विचार से जुड़े नहीं थे। सुरेंद्र मेहता को निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के प्रभाव से टिकट मिला था, जबकि मनोहर प्रसाद सिंह को जदयू नेताओं का करीबी माना जाता है।


उधर, राष्ट्रीय जनता दल भी ढाका से विधायक फैसल रहमान को लेकर दुविधा में है। फैसल, पूर्व सांसद मोतिउर रहमान के बेटे हैं और उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की वजह अपनी मां की गंभीर बीमारी बताई है। सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव के पटना लौटने के बाद इस मामले में निर्णय लिया जा सकता है। इस बीच कांग्रेस विधायकों ने आरजेडी पर अपमान और अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पार्टी ने एकतरफा फैसला लेते हुए ए.डी. सिंह को विपक्ष का उम्मीदवार घोषित कर दिया।


बता दें कि 16 मार्च को राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान हुआ था। 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक थे, जबकि विपक्ष के पास कुल 41 का आंकड़ा था। जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे, लेकिन विधायकों की अनुपस्थिति के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया। अंततः द्वितीय वरीयता के वोटों के आधार पर NDA उम्मीदवार शिवेश राम को विजेता घोषित किया गया।