Bihar News: बिहार सरकार के अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर रहे. सचिवालय से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारी सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 4 का अनुपालन नहीं कर रहे. सरकार और सूचना आयोग की तरफ से कई बार पत्र भेजकर लागू करने को कहा गया, लेकिन अधिकारी सुन ही नहीं रहे. एक बार फिर से सरकार ने विभाग के सचिव से लेकर डीएम-एसपी को पत्र लिखा है और धारा-4 को हर हाल में लागू करने का आदेश दिया है.  


सचिव से लेकर डीएम-एसपी को पत्र 

सामान्य प्रशासन विभाग के  संयुक्त सचिव आफाक अहमद ने 31 अगस्त को सभी विभागों के सचिव,डीजीपी, लोकायुक्त कार्यालय के सचिव, सभी आयोग के सचिव, सभी प्रमंडल के कमिश्नर,आईजी-डीआईजी,सभी जिलों के डीएम-एसपी और सभी विश्वविद्यालयों के कुल सचिव को पत्र लिखा है. सरकार के पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल रिट पीटिशन नं-990/ 2021 में आदेश पारित किया था. जिसमें सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 की धारा 4 का अनुपालन हर हाल में करना है. इस संबंध में बिहार सूचना आयोग द्वारा 6 अगस्त 2026 को पत्र भी भेजा है.  


कई पत्र के बाद भी नहीं लागू हुआ

सरकार के पत्र में कहा गया है कि किशन चंद जैन बनाम भारत सरकार एवं अन्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा- 4 का अनुपालन सभी विभाग- कार्यालयों में कराया जाना है. इस संबंध में सूचना आयोग की तरफ से 9 मई 2025 और 6 मार्च 2026 को अनुरोध किया गया था. विभाग के स्तर से भी 21 मई 2025 को पत्र भेजकर लागू करने का अनुरोध किया गया. लेकिन अब तक धारा-4 का अनुपालन नहीं किया गया है. विभागों, प्रमंडल, जिला, विश्वविद्यालय द्वारा वांछित सूचना का स्वप्रेरण प्रकटीकरण नहीं किया गया है. 

सर्वोच्च प्राथमिकता पर लागू करें-सरकार

ऐसे में आप सभी अपने अधिकार क्षेत्र के सभी लोक पदाधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 की धारा-4 के आलोक में नियमित अंतराल पर विभिन्न साधनों के माध्यम से ( इंटरनेट-वेबसाइट) सूचना प्रकाशित करने को लेकर निर्देश दें. इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देकर कराएं.   

RTI में धारा-4 क्या है ? 

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 की धारा 4 सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों (सरकारी विभागों और संस्थाओं) के लिए स्वतः प्रकटीकरण (Suo Motu Disclosure) या स्वतः संज्ञान से जानकारी सार्वजनिक करने की अनिवार्य जिम्मेदारी तय करती है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि आम जनता को सामान्य जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन करने की आवश्यकता नहीं पड़े और पारदर्शिता बनी रहे.