Bihar News: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की समधन ज्योति मांझी के काफिले पर हमले के बाद राजद और हम आमने-सामने है. मांझी ने अपने विधायक पर हुए हमले को लेकर तल्ख तेवर अपनाते हुए गुंडों को खुली चुनौती दी है. वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने जंगलराज की याद कराते हुए एक पुराना वाकया याद कराया है. 

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुंदर शऱरण ने कहा है कि मुझे आज भी याद है…।  साल 2004, माघ का महीना। सुबह करीब 10 बजे मोटरसाइकिल से पटना जा रहे थे। दनियावाँ के पास एक लंबा सिंगल पुल पड़ता था, जहां अक्सर जाम लगता था। हम आधा पुल पार कर चुके थे कि अचानक सामने से हूटर बजाता हुआ एक काफिला आया और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस वाले दौड़-दौड़कर गाड़ियां पीछे कराने लगे। जो जहां था वहीं रुक गया। जिसने थोड़ा भी देर किया, उसके ऊपर लाठी-डंडे चलने लगे। कई लोगों की बाइक गिर गई, दर्जनों आम लोग पिटे। किसी तरह हम भी गाड़ी घुमाकर पीछे आए। फिर पूरा पुल खाली कराया गया और जिस काफिले को निकाला गया उसमें थे — राबड़ी देवी जी के भाई, लालू प्रसाद यादव जी के साले सुभाष यादव।

यही था उस दौर का “जलवा”… यही था जंगलराज का डर। और आज? आज अगर दलित समाज की एक महिला, तीन-तीन बार की विधायक, अपने ही क्षेत्र में गुजर रही हैं तो उनकी गाड़ी रोकी जाती है। पीछे करने का दबाव बनाया जाता है। गार्ड उतरता है तो उसके साथ मारपीट होती है। विधायक के साथ धक्का-मुक्की की कोशिश होती है। भद्दी-भद्दी जातिसूचक गालियां दी जाती हैं। क्यों? सिर्फ इसलिए कि ज्योति मांझी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की विधायक हैं। क्योंकि वे उस समाज की प्रतिनिधि हैं जिसे सदियों तक सबसे नीचे दबाकर रखा गया।

लालू यादव की राजनीति का सबसे खतरनाक “मेमोरी कार्ड” आज भी उनके लोगों के दिमाग में फिट है —दलित, अति पिछड़ा, गरीब, अल्पसंख्यक… कोई भी उनके बराबर कैसे चल सकता है? कैसे फोर व्हीलर में गार्ड के साथ निकल सकता है?

जो लोग संविधान की दुहाई देते हैं, सामाजिक न्याय की बात करते हैं, वही आज दलित नेताओं को रास्ता देने तक को तैयार नहीं हैं। और यही वो लोग हैं जो दलितों पर सबसे अधिक अत्याचार करते हैं ,बिहार के थानों में दर्ज sc/st act के सबसे ज्यादा मामले लालू जी के ही समर्थकों पर दर्ज हैं . जो कहते थे कि “घोड़ी पर नहीं बैठने देते”, “आगे नहीं बढ़ने देते”, वही हमेशा से दलितों के शोषक रहे हैं .

उन्होंने कहा कि याद रखिए…अब वह दौर नहीं रहा। यह जीतन राम मांझी का दौर है। अब दलितों का नरसंहार नहीं किया जा सकता है ,अब दलितों को रौंदने की हर मानसिकता को कानून के बुलडोजर से रौंद दिया जाता है . यह संविधान से ताकत पाए हुए समाज का दौर है। यह सम्राट चौधरी की सरकार है।