MLC Salary 2026: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए मतगणना जारी है। इस चुनाव में 150 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है। इनमें 90 प्रत्याशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से और 60 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावी नतीजों के बीच विधान परिषद के सदस्यों यानी एमएलसी (MLC) को मिलने वाले वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं को लेकर भी चर्चा हो रही है। आखिर बिहार में एक एमएलसी को हर महीने कितनी सैलरी मिलती है और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र तथा तेलंगाना में उन्हें कितना वेतन दिया जाता है? आइए जानते हैं।
सभी राज्यों में एक समान नहीं होती MLC की सैलरी
देश में विधान परिषद के सदस्यों का वेतन पूरे भारत में एक समान नहीं है। इसे संबंधित राज्य सरकार अपने नियमों और कानूनों के तहत निर्धारित करती है। आमतौर पर एमएलसी को मिलने वाले वेतन और भत्तों का पैकेज संबंधित राज्य के विधायकों के वेतन-भत्तों के समान या उनके अनुरूप होता है।
इस वजह से अलग-अलग राज्यों में एमएलसी की कुल मासिक आय में अंतर देखने को मिलता है। रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना उन राज्यों में शामिल हैं, जहां विधान परिषद के सदस्यों को अपेक्षाकृत अधिक वेतन और भत्ते मिलते हैं।
उत्तर प्रदेश में MLC को सबसे ज्यादा वेतन?
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एमएलसी का कुल मासिक वेतन और भत्ते मिलाकर लगभग 2.66 लाख से 2.96 लाख रुपये तक बताया गया है। यहां मूल मासिक वेतन 35,000 रुपये है। इसके अलावा निर्वाचन क्षेत्र और चिकित्सा सहित विभिन्न भत्ते जुड़ने से कुल मासिक पैकेज बढ़ जाता है। मूल वेतन और कुल मासिक राशि में अंतर की मुख्य वजह यही अतिरिक्त भत्ते हैं। हालांकि, वास्तविक भुगतान लागू नियमों और संबंधित सुविधाओं की पात्रता पर निर्भर करता है।
महाराष्ट्र और तेलंगाना में कितना मिलता है वेतन?
महाराष्ट्र में एमएलसी को वेतन और भत्तों सहित लगभग 2.52 लाख रुपये प्रतिमाह मिलने का आंकड़ा रिपोर्ट में दिया गया है। वहीं, तेलंगाना में यह राशि लगभग 2.50 लाख रुपये प्रतिमाह बताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर तीनों राज्य एमएलसी के वेतन और भत्तों के मामले में ऊंचे स्तर पर आते हैं। हालांकि, इन राशियों की तुलना करते समय मूल वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
बिहार में MLC की सैलरी कितनी है?
बिहार में एक एमएलसी को वेतन और भत्तों सहित लगभग 1.60 लाख से 1.70 लाख रुपये प्रतिमाह मिलने का आंकड़ा रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें मूल वेतन 50,000 रुपये बताया गया है। इसके अतिरिक्त निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और निजी सहायक से संबंधित भत्ता जैसी मदें भी शामिल हो सकती हैं।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बताए गए आंकड़ों की तुलना में बिहार का कुल मासिक पैकेज कम है। हालांकि, केवल मूल वेतन के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि की कुल मासिक आय का आकलन करना सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें विभिन्न भत्तों और सुविधाओं का भी योगदान होता है।
MLC को सैलरी के अलावा मिलते हैं कई फायदे
एमएलसी को मासिक वेतन के अतिरिक्त कई तरह की सुविधाएं भी मिल सकती हैं। इनका उद्देश्य सदन की कार्यवाही में भाग लेने और सार्वजनिक दायित्वों के निर्वहन से जुड़े खर्चों में सहायता देना है।
1. यात्रा की सुविधा
रिपोर्ट के मुताबिक, एमएलसी को ट्रेन और हवाई यात्रा के लिए सालाना मुफ्त यात्रा कूपन या अन्य यात्रा सुविधाएं मिल सकती हैं। इनकी बताई गई कीमत लगभग 3 लाख से 4.25 लाख रुपये तक है। हालांकि, यात्रा की पात्रता, सीमा और इस्तेमाल के नियम संबंधित राज्य के प्रावधानों पर निर्भर करते हैं।
2. दैनिक भत्ता
विधान परिषद की बैठकों या सत्रों में शामिल होने पर दैनिक भत्ता भी दिया जा सकता है। रिपोर्ट में इसकी राशि लगभग 2,500 से 3,000 रुपये प्रतिदिन बताई गई है। यह नियमित मासिक वेतन से अलग होता है और संबंधित नियमों के अनुसार देय होता है।
3. सरकारी आवास या मकान किराया भत्ता
एमएलसी को सरकारी आवास की सुविधा या नियमानुसार मकान किराया भत्ता मिल सकता है। इसका लाभ संबंधित राज्य के नियमों और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर दिया जाता है।
4. बिजली की सुविधा
रिपोर्ट में एमएलसी को हर महीने लगभग 2,000 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस सुविधा की वास्तविक सीमा और पात्रता राज्य के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।
5. वाहन खरीदने के लिए आर्थिक सहायता
एमएलसी को वाहन खरीदने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण या अग्रिम राशि उपलब्ध कराने की सुविधा भी हो सकती है। रिपोर्ट में इसके लिए 15 लाख से 25 लाख रुपये तक की राशि का उल्लेख किया गया है। इसकी वास्तविक सीमा, ब्याज दर और भुगतान की शर्तें संबंधित राज्य के नियमों से निर्धारित होती हैं।
कार्यकाल खत्म होने के बाद कितनी मिलती है पेंशन?
विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पेंशन का प्रावधान भी हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व एमएलसी को लगभग 45,000 रुपये या उससे अधिक मासिक पेंशन मिलने का उल्लेख है। हालांकि, पेंशन की वास्तविक राशि संबंधित राज्य के कानून, सदस्य के कार्यकाल और लागू पात्रता नियमों पर निर्भर करती है।
वेतन के साथ भत्ते और सुविधाएं भी अहम
एमएलसी की कुल आर्थिक सुविधाओं में केवल मूल वेतन ही शामिल नहीं होता। निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, दैनिक भत्ता, यात्रा सुविधा, आवास और अन्य अनुमन्य लाभ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में मूल वेतन और कुल मासिक पैकेज के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 के नतीजों के बीच एमएलसी के वेतन और सुविधाओं की चर्चा अहम है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के वेतन, भत्तों, यात्रा कूपन, बिजली और पेंशन से जुड़े आंकड़ों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित राज्य सरकार के नवीनतम आधिकारिक नियमों से सत्यापित करना जरूरी है।