Bihar Politics: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश गुरुवार को बिहार विधान परिषद के सदस्य बन ही गए। राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाने के बाद विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण में एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश पहली बार किसी सदन के सदस्य बने हैं। इससे पहले वे विधायक या एमएलसी बने बिना ही मंत्री पद पर कार्यरत थे।



शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत में दीपक प्रकाश ने कहा कि अब वह दोगुनी ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ बिहार तथा देश के विकास के लिए काम करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया।



दीपक प्रकाश को राज्यपाल द्वारा मनोनीत कोटे की उस सीट पर सदस्य बनाया गया है, जो भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। देवेश कुमार का कार्यकाल मार्च 2027 तक था, लेकिन उन्होंने निर्धारित अवधि से पहले ही इस्तीफा दे दिया।



राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने दीपक प्रकाश के लिए सीट छोड़ी। इसके बाद राज्य सरकार ने उनका नाम राज्यपाल को भेजा, जिस पर राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने मंजूरी दे दी। मनोनयन की अधिसूचना बुधवार को जारी की गई थी।



दीपक प्रकाश पहली बार नवंबर 2025 में तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बने थे। इसके बाद मई 2026 में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्हें दोबारा कैबिनेट मंत्री बनाया गया। दोनों ही बार वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।



इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाल ही में शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य बने इतने लंबे समय तक मंत्री पद पर कैसे बने रहे। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है।



भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। ऐसे में एमएलसी के रूप में मनोनयन और शपथ के बाद दीपक प्रकाश का मंत्री पद संवैधानिक रूप से सुरक्षित हो गया है।