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नीतीश के करीबी बड़े नेता का खुलासा, मैंने विधान परिषद में शराब न पीने की शपथ नहीं ली थी बाहर जाता हूं तो..

बिहार में शराबबंदी कानून पर सियासी घमासान तेज हो गया है। सत्ता पक्ष के भीतर ही उठी विरोध की आवाज ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। क्या अब करीब एक दशक बाद इस कानून की समीक्षा या बदलाव की जमीन तैयार हो रही है?

01-Mar-2026 04:05 PM

By First Bihar

Bihar News: बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग जोर-शोर से चल ही है। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सत्ताधारी दल के नेताओं ने भी CM नीतीश कुमार से शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की है। लेकिन अब शराबबंदी कानून पर उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड में भी दो फाड़ नजर आ रहा है। JDU के सीतामढ़ी से सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर ने CM नीतीश की महत्वाकांक्षी शराबबंदी कानून का विरोध किया है।


जानकारी हो कि, बिहार में जब शराबबंदी कानून लागू हुआ था तो देवेश चन्द्र ठाकुर विधान परिषद के सदस्य थे। ऐसे में जब सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी कानून को लेकर बिहार के दोनों सदनों के सभी मेंबर को यह शपथ लेने को कहा था कि- आपलोग शपथ ले कि अपने जीवनकाल में कभी भी शराब का सेवन नहीं करेंगे तो देवेश ने शपथ लेने से इनकार कर दिया था। अब उन्होंने इस बात का खूलासा किया है कि आखिर वह शपथ क्यों नहीं लिए थे।


दरअसल, देवेश ने कहा कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद जब मुख्यमंत्री ने शपथ दिलाई थी, तो मैंने शपथ भी नहीं ली थी। उसके बाद मुख्यमंत्री ने मुझे बुलाकर पूछा तो मैंने उन्हें बताया कि मैं बिहार में शराब नहीं पीऊंगा, लेकिन यहां से बाहर जाऊंगा तो पी सकता हूं। सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि CM नीतीश की पार्टी JDU के नेता भी इस बात को समझते हैं कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह लागू करना मुश्किल है। बावजूद इसके केवल मुख्यमंत्री के फैसले की वजह से यह कानून अब तक लागू है। पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि बिहार में शराबबंदी खत्म हो जाए।


इसके अलावा सांसद ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कभी हो ही नहीं सकती। जब यह कानून लाया गया था, उस वक्त भी मैंने इसकी आलोचना की थी। मैं और मेरे साथ एक और नेता थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के सामने इसका विरोध किया था। मैं उस नीति से सहमत नहीं था। अगर यह कानून हट जाए तो बहुत अच्छा रहेगा, क्योंकि पूरी दुनिया में कहीं भी यह कानून सफल नहीं हुआ है। इसके आगे उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के बावजूद अभी भी शराब मिल रही है। झारखंड और उत्तर प्रदेश से शराब बिहार लाई जाती है। 


बता दें कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी 1 अप्रैल 2016 से लागू की गई थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद 2 अक्टूबर 2016 को कड़े कानून के साथ इसे और सख्ती से लागू किया गया। 


अब इस कानून को लागू हुए लगभग एक दशक का समय हो गया है, लेकिन अब तक इसका पूर्ण रूप से पालन नहीं हो सका है। शराबबंदी के बाद बिहार के राजस्व को भी भारी नुकसान हुआ है। साल 2010-11 में एक्साइज ड्यूटी से 1,523 करोड़ रुपये राज्य को मिलते थे, जो साल 2014-15 में बढ़कर 3,217 करोड़ रुपये हो गए थे। शराबबंदी कानून लागू होने के बाद यह एक्साइज ड्यूटी लगभग शून्य हो गई। राज्य सरकार के कर राजस्व में भी गिरावट देखी गई है।


साल 2014-15 में यह आय के स्रोतों का 21.99 प्रतिशत था, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में घटकर 18.81 प्रतिशत रह गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार का कर राजस्व 65,800 करोड़ रुपये, यानी आय के स्रोतों का 18.92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। शराबबंदी को लेकर विधानमंडल में उठ रहे सवाल और नेताओं के बीच वार-पलटवार इस बात का संकेत हैं कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद लोगों की शराब तक पहुंच बनी हुई है।