Bihar Education Loan: बिहार सरकार की शिक्षा ऋण योजना को लेकर विपक्ष और जन सुराज भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि योजना पहले की तरह जारी है, बल्कि इसका दायरा और लाभ बढ़ाया गया है।
कुंतल कृष्ण ने कहा कि अब सामान्य रूप से 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण दिया जा रहा है, जबकि 164 महत्वपूर्ण संस्थानों में पढ़ाई के लिए ऋण की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। इसमें 2 लाख रुपये तक का ऋण बिहार शिक्षा वित्त निगम और 2 से 4 लाख रुपये तक का ऋण बैंकों के सहयोग से उपलब्ध कराया जाएगा। 10 लाख रुपये तक का ऋण बिहार सरकार की योजना के तहत चिन्हित राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के लिए दिया जाएगा। इसके लिए आवेदन विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बिहार की योजना केंद्र की योजना से अधिक व्यापक है। केंद्र की योजना में 4.5 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों को शतप्रतिशत ब्याज अनुदान मिलता है, जबकि इससे अधिक आय वालों को केवल 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलता है और लाभ चिन्हित पाठ्यक्रमों तक सीमित है। बिहार में सभी आय वर्ग के परिवारों और अतिरिक्त पाठ्यक्रमों को भी शतप्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पाठ्यक्रम की अवधि और एक वर्ष की मोरेटोरियम अवधि तक पूरा ऋण ब्याजमुक्त रहेगा। इसके बाद समय पर ऋण चुकाने वाले विद्यार्थियों को 30 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज छूट तथा छात्राओं को कुल 40 प्रतिशत ब्याज छूट दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह पैसा सभी बच्चों का है। ऋण की वसूली नहीं होने पर नए विद्यार्थियों को योजना का लाभ प्रभावित होगा। अब तक 4,15,938 लाभार्थियों को 8,865 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। इनमें 1,63,274 लाभार्थियों से 1,263 करोड़ रुपये की वसूली योग्य है, जबकि 46,979 लाभार्थियों से 273.18 करोड़ रुपये की ही वसूली हुई है। लगभग 79 प्रतिशत की डिफॉल्ट दर चिंता का विषय है।
कुंतल कृष्ण ने कहा कि बेहतर शैक्षणिक माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देना भी योजना का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। विपक्ष को भ्रम फैलाने के बजाय विद्यार्थियों के हित में तथ्य सामने रखने चाहिए।