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31-Mar-2026 04:09 PM
By First Bihar
PATNA: बिहार में कांग्रेस ने नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। जिसमें जातीय समीकरण साफ तौर पर नजर आ रहा हैं। इस सूची में ब्राह्मण और यादव वर्ग का सबसे अधिक दबदबा देखने को मिला है, जबकि भूमिहार जाति राजपूतों पर भारी पड़ी है। हालांकि मुस्लिम और दलित वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कुल 53 जिलाध्यक्षों में से सबसे अधिक 10-10 पद ब्राह्मण और यादव जाति को मिले हैं। सवर्ण वर्ग का भी सूची में मजबूत प्रभाव दिखाई देता है। सवर्ण वर्ग से कुल 24 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं, जिनमें 10 ब्राह्मण, 7 भूमिहार, 5 राजपूत और 2 कायस्थ शामिल हैं। अल्पसंख्यक वर्ग को भी कांग्रेस ने महत्व दिया है। सूची में 7 मुस्लिम और 1 सिख जिलाध्यक्ष शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति यानी दलित वर्ग से 7 नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन को मजबूत करने के लिए यह बड़ा बदलाव किया है। हाईकमान के निर्देश पर संगठनात्मक जिलों की संख्या 40 से बढ़ाकर 53 कर दी गई, जिसके बाद सभी जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई। इस सूची में 43 नए चेहरे शामिल हैं, जबकि 10 पुराने जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है।
पिछड़ा वर्ग में यादवों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखता है। 2023 की जाति गणना के अनुसार, बिहार में यादवों की आबादी लगभग 14.26 प्रतिशत है। कांग्रेस की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल भी लंबे समय से इस वर्ग पर केंद्रित राजनीति करती रही है, और कांग्रेस ने भी इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए यादवों को प्राथमिकता दी है।
इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग से कुशवाहा समाज के 3 नेताओं को भी जिलाध्यक्ष बनाया गया है, जिसे ‘लव-कुश’ समीकरण साधने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को इस सूची में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, जबकि राज्य में उनकी आबादी करीब 36 प्रतिशत है। कुल मिलाकर, कांग्रेस की यह नई सूची जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश तो दिखाती है, लेकिन कुछ वर्गों की अनदेखी को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
किस जाति से बने जिलाध्यक्ष देखिये?
ब्राह्मण - 10
यादव - 10
मुस्लिम - 7
दलित - 7
भूमिहार - 7
राजपूत - 5
कुशवाहा - 3
कायस्थ - 2
सिख - 1
अन्य - 1


