Bihar News: बिहार विधानसभा की तीसरे दिन की कार्यवाही में ध्यानाकर्ष्ण के दौरान राज्यभर में बड़ी संख्या में राशन कार्ड के रद्द किए जाने का मामला विपक्ष ने उठाया। विपक्षी सदस्य का कहना था कि राशन कार्ड बनाने के समय तो एपीएल और बीपीएल नहीं देखा गया लेकिन अब छोटी-छोटी कमियां ढूंढकर गरीब परिवारों के राशन कार्ड रद्द किए जा रहे हैं।
समस्तीपुर के विभूतिपुर से सीपीआईएम के विधायक अजय कुमार ने सदन में राज्यभर में 35 लाख से अधिक राशन कार्ड को रद्द करने का मामला उठाया। उन्होंने इस मामले पर सरकार का ध्यान आकर्षण करते हुए कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त संदिग्ध डाटा के आधार पर राज्य सरकार ने 35.36 लाख राशन कार्ड को रद्द करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है।
उन्होंने सदन को बताया कि इसकी पुष्टि खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के द्वारा भी की गई है। पूर्व में जब राशन कार्ड बनाए जा रहे थे उस समय एपीएल-बीपीएल जैसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी जबकि अभी विभिन्न तरह के कार्डों के नाम पर या मामूली कमियों को ढूंढकर जानबूझकर राशन कार्ड को रद्द किया जा रहा है।
विधायक ने बताया कि राज्य में अभी तक 1.87 करोड़ से अधिक राशन कार्ड धारक हैं और कुल लाभुकों की संख्या 8.20 करोड़ के आसपास है। सिर्फ पटना जिले में 2.99 लाख राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। मुजफ्फरपुर में 32 हजार से अधिक, अररिया में 17 हजार से अधिक, भागलपुर में 11 हजार से अधिक, समस्तीपुर में 19 हजार और दरभंगा में 16 हजार से अधिक राशन कार्ड रद्द हुए हैं।
सीपीआईएम के विधायक अजय कुमार ने कहा कि राशन कार्ड रद्द होने से राज्य के लाखों पात्र और गरीब परिवार के नाम सूचि से कट गए हैं जिससे उन्हें इसके लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। राशन कार्ड रद्द होने से उजाला योजना, आयुष्मान भारत कार्ड, श्रम कार्ड, पेंशन, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसी कल्याणकारी योजनाओं से भी वंचित होना पड़ेगा।