Bihar News: हर शहर की भौगोलिक, ऐतिहासिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए सभी शहरों के विकास के लिए एक जैसी नीति नहीं अपनाई जा सकती। स्थानीय जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ही शहरों का मास्टर प्लान तैयार करना होगा। शहर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के ग्रोथ सेंटर हैं। सरकार का स्पष्ट विजन है कि बिहार के शहर संतुलित, समावेशी, टिकाऊ और बेहतर ‘ईज ऑफ लिविंग’ वाले बनें।

ये बातें नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय 'बिहार के शहरों का सतत विकास, नियोजन की प्रक्रिया और चुनौतियों को समझने पर जोर' कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान कहीं।मंत्री ने अधिकारियों और शहरी स्थानीय निकायों  को निर्देश दिया कि कार्यशाला को केवल एक शैक्षणिक अभ्यास के रूप में न लें। अलग-अलग शहरों के अनुभवों से सीखते हुए अपने-अपने शहरों के लिए व्यावहारिक और प्रभावी योजनाएं तैयार कर उन्हें धरातल पर उतारना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को विकसित और समृद्ध बिहार देने के लिए आज की शहरी प्लानिंग दूरदर्शी होनी चाहिए।

स्थानीय वास्तविकताओं के आधार पर बनेगी योजना

नीतीश मिश्रा ने कहा कि शहरों के विकास की रणनीति तैयार करते समय स्थानीय परिस्थितियों को केंद्र में रखना जरूरी है। किसी एक शहर में सफल मॉडल को उसी रूप में दूसरे शहर में लागू करने के बजाय वहां की भौगोलिक संरचना, जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों, ऐतिहासिक विरासत और उपलब्ध संसाधनों का अध्ययन किया जाना चाहिए।उन्होंने दिल्ली के मास्टर प्लान और देश के अन्य सफल शहरी विकास मॉडलों से सीख लेने की जरूरत बताई। मंत्री ने युवा अधिकारियों और योजनाकारों से अपनी पूरी क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ बिहार के शहरीकरण को नई दिशा देने का आह्वान किया।

12 सैटेलाइट टाउन, 43 शहरों का मास्टर प्लान

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि बिहार में शहरी विकास को नियोजित और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों तथा जीआईएस आधारित प्लानिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों को साक्ष्य आधारित योजना तैयार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। कार्यशाला में बताया गया कि राज्य में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए हुडको के साथ एक लाख करोड़ रुपये के लाइन ऑफ क्रेडिट का समझौता किया गया है। वहीं राज्य के 43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

अनियोजित विकास से बाद में बढ़ती है लागत

दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. एन. श्रवण कुमार ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार देश के सबसे कम शहरीकृत राज्यों में शामिल है। हालांकि, आर्थिक विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए शहरीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने दिल्ली और जमशेदपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि अनियोजित विकास के बाद शहरों में रेट्रोफिटिंग करना काफी खर्चीला और मुश्किल होता है। इसलिए शुरुआत से ही नियोजित विकास पर जोर देना होगा। स्थानीय हितधारकों के साथ चर्चा कर शहरों को अधिक ‘लिवेबल’ बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर अवसरों के लिए पलायन न करना पड़े।

2040 तक 80 करोड़ हो सकती है शहरी आबादी

हडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि देश में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और वर्ष 2040 तक शहरी क्षेत्रों की आबादी लगभग दोगुनी होकर 80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में भविष्य के शहरों को केवल विस्तारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें जलवायु परिवर्तन और आपदाओं के लिहाज से भी मजबूत बनाना होगा। उन्होंने अमृत सिटी, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना-2 और अर्बन चैलेंज फंड जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से जलापूर्ति, सीवेज, स्वच्छता, खेल मैदान और स्टेडियम जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति दी जा सकती है। अमरावती, नया नागपुर और हैदराबाद जैसे शहरों के अनुभवों से सीख लेकर बिहार में आधुनिक, समावेशी और टिकाऊ शहरी विकास का मॉडल तैयार किया जा सकता है।

कार्यक्रम में विभाग के सचिव संदीप कुमार आर. पुडुकलकट्टी, अपर सचिव मनोज बिहार हाउसिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक एवं विभाग के विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे एवं नवल किशोर चौधरी, बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बुडको) के प्रबंध निदेशक एवं विभाग के सचिव अनिमेष कुमार पराशर, हडको की कार्यकारी निदेशक सुश्री वर्षा पुनहानी समेत विभिन्न नगर निकायों के अधिकारी, अर्बन प्लानर्स और आर्किटेक्ट्स मौजूद रहे।