Bihar Politics: बिहार के बेगूसराय के कंकौल स्थित प्रेक्षा गृह सह आर्ट गैलरी में रविवार को आयोजित निजी विद्यालयों की शिक्षा संगोष्ठी उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब मटिहानी से राजद विधायक नरेंद्र कुमार उर्फ बोगो सिंह के संबोधन के दौरान मंच पर मौजूद केंद्रीय मंत्री समेत सत्ता पक्ष के कई नेता कार्यक्रम छोड़कर बाहर निकल गए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निजी विद्यालयों की भूमिका पर आयोजित इस सेमिनार में शिक्षा से अधिक मंच पर घटित यह राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया।
बेगूसराय पब्लिक स्कूल एसोसिएशन (रजि.) द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में जिले के निजी विद्यालय संचालकों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम का विषय "गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में निजी विद्यालयों की भूमिका" रखा गया था। मंच पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री एवं बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह, बेगूसराय विधायक कुंदन कुमार सिंह, तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार सिंह, विधान पार्षद सर्वेश कुमार सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष राजीव कुमार वर्मा, पूर्व विधायक राजकुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
बताया जाता है कि कार्यक्रम निर्धारित समय पर चल रहा था और सभी अतिथियों ने शिक्षा व्यवस्था, नई शिक्षा नीति तथा निजी विद्यालयों की भूमिका पर अपने विचार रखे। इसी बीच मटिहानी विधायक नरेंद्र कुमार उर्फ बोगो सिंह कार्यक्रम में पहुंचे। उस समय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह मंच से अपना संबोधन दे रहे थे। मंत्री ने मंच से विधायक का स्वागत भी किया।
इसके बाद जब बोगो सिंह को बोलने के लिए आमंत्रित किया गया तो उन्होंने अपने संबोधन में सरकारी विद्यालयों की स्थिति, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और निजी विद्यालयों के योगदान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी कई सरकारी विद्यालय बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे-जैसे बोगो सिंह शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखते गए, मंच का माहौल बदलता गया। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, बेगूसराय विधायक कुंदन कुमार सिंह, तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष राजीव कुमार वर्मा समेत सत्ता पक्ष के कई नेता मंच से उतरकर बाहर चले गए। नेताओं के एक-एक कर उठने से कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई और पूरा सभागार इस घटनाक्रम पर नजर टिकाए रहा।
अपने संबोधन में विधायक नरेंद्र कुमार उर्फ बोगो सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निजी विद्यालयों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि बेगूसराय और बिहार के हजारों छात्र निजी विद्यालयों की बदौलत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने उदाहरण के तौर पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से भी कहा कि यदि सरकारी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति देखनी है तो क्षेत्र के कई विद्यालयों का दौरा किया जाना चाहिए। बोगो सिंह ने दावा किया कि सरकारी विद्यालयों की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा राजनीति का विषय नहीं बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार, मंच से नेताओं के जाने के बावजूद बोगो सिंह ने अपना संबोधन जारी रखा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विस्तार से रखा। उनके भाषण के दौरान सभागार में मौजूद लोगों की नजरें मंच और बाहर जाते नेताओं पर टिकी रहीं। यही कारण रहा कि शिक्षा पर केंद्रित यह कार्यक्रम अचानक राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।
वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में शिक्षा के मुद्दे पर सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर राइट टू एजुकेशन (आरटीई) कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर रही हैं। निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा देने का प्रावधान इसी नीति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी विद्यालय दोनों समाज के अभिन्न अंग हैं और दोनों के समन्वित प्रयास से ही शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है ताकि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।
गौरतलब है कि यह सेमिनार निजी विद्यालयों की भूमिका, नई शिक्षा नीति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विमर्श के लिए आयोजित किया गया था। लेकिन मंच पर हुए घटनाक्रम ने पूरे कार्यक्रम की दिशा बदल दी। अब जिले के शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर शिक्षा के मुद्दे पर बोल रहे एक विधायक के संबोधन के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं का मंच छोड़कर जाना महज संयोग था या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा था।
बेगूसराय से हरेराम दास की रिपोर्ट...