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Assembly Elections 2026: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए बड़ी सियासी परीक्षा, इन राज्यों में बड़ी चुनौती

Assembly Elections 2026: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन चुनावों में भाजपा के सामने कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।

16-Mar-2026 11:49 AM

By FIRST BIHAR

Assembly Elections 2026: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन चुनावों में भाजपा के सामने कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।


चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन चुनावों से केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को काफी उम्मीदें हैं। भाजपा उन राज्यों में भी जीत हासिल करने की कोशिश कर रही है, जहां उसे पारंपरिक रूप से कम समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में ये चुनाव पार्टी के लिए बड़ी सियासी परीक्षा माने जा रहे हैं।


चुनाव आयोग के अनुसार, सभी राज्यों में मतगणना 4 मई को होगी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, जहां 23 और 29 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। वहीं तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा। इसके अलावा केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे।


पांच राज्यों की सत्ता की इस दौड़ में भाजपा के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन सबसे बड़ी परीक्षा पश्चिम बंगाल में मानी जा रही है। यहां पार्टी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मजबूत तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ मैदान में है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था। 294 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी की सीटें 2016 में सिर्फ तीन से बढ़कर 77 हो गई थीं।


इस बार भाजपा नई चुनावी रणनीति के साथ मैदान में है और उसे उम्मीद है कि ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ बनी जनविरोधी लहर का फायदा मिलेगा। पार्टी भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों को उठाकर तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रही है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल में सत्ता में है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में किसी मजबूत स्थानीय चेहरे की कमी है। ऐसे में पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है, जबकि ममता बनर्जी राज्य की मजबूत और प्रभावशाली नेता बनी हुई हैं।


वहीं असम में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है। पार्टी अपनी सरकार के कामकाज और मजबूत संगठन के दम पर चुनाव लड़ रही है। हालांकि कांग्रेस नीत विपक्ष सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय मुद्दों को भुनाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा को अल्पसंख्यक मतदाताओं, खासकर बांग्ला भाषी मुसलमानों के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की लंबे समय से लंबित मांग भी चुनावी मुद्दा बन सकती है।


दक्षिण भारत की बात करें तो भाजपा केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल में पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी और यहां उसे वामपंथी दलों से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। हालांकि हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में मिली सफलता से भाजपा को इस बार कुछ बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। केरल में मुख्य मुकाबला कांग्रेस नीत यूडीएफ और माकपा नीत एलडीएफ के बीच माना जा रहा है।