Bihar Politics: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह के जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासन के बाद सियासी हलचल तेज है। पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। साथ ही, अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की गई है। इस घटनाक्रम के बीच जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह और संजय झा दिल्ली में साथ नजर आए।
दरअसल, बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बगावत कर दिया और अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ ताल ठोकने लगे। अनंत सिंह ने खुला ऐलान किया कि वह किसी हाल में नीरज कुमार को चुनाव नहीं जीतने देंगे।
इसके बाद वह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार करने लगे। पटना से लेकर नवादा तक उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के लिए वोट की अपील की। ऐसा माना जा रहा था कि अनंत सिंह के ऊपर जेडीयू के किसी बड़े नेता का सपोर्ट है, तभी वह इस तरह की बगावत कर रहे हैं।
अनंत सिंह के बगावती तेवर को देख पार्टी आलाकमान ने मुंगेर सांसद ललन सिंह को उन्हें साधने की जिम्मेवारी सौंपी हालांकि ललन सिंह ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने भी कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने अनंत सिंह के खिलाफ काम किया था, तब पार्टी ने नीरज पर एक्शन क्यों नहीं लिया।
अनंत सिंह और पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच विवाद के दौरान संजय झा ने ही ललन सिंह को दोनों नेताओं के बीच मतभेद दूर करने की जिम्मेदारी दी। इस बीच एक तरफ ललन सिंह मोकामा विधायक अनंत सिंह के साथ मजबूती के साथ खड़े दिखे तो दूसरी तरफ पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा अनंत सिंह पर कार्रवाई की बात कहते रहे।
अनंत सिंह पर जेडीयू के दोनों वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयानों से ऐसा लगने लगा था कि नीतीश कुमार की पार्टी दो धड़ों में बंट गई है। इसी बीच वोटिंग खत्म होने के बाद अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूनम देवी के खिलाफ बड़ा एक्शन हुआ और दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
अनंत सिंह पर एक्शन के बाद ललन सिंह और संजय झा दिल्ली में एकसाथ नजर आए। मीडियाकर्मियों ने जब जेडीयू नेताओं से अनंत सिंह के बारे में सवाल पूछा तो दोनों बचकर निकल गए। दोनों नेताओं का दिल्ली में साथ नजर आना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। ऐसे में सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि अनंत सिंह किसी राजनीति के शिकार तो नहीं हो गए हैं?