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10-Jul-2021 03:48 PM
PATNA : लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद आज दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. दिल्ली जाने से पहले उन्होंने एक बार फिर अपने चाचा पशुपति पारस और जनता दल यूनाइटेड पर निशाना साधा है. इसके साथ ही उन्होंने जेडीयू में जल्द ही बड़ी टूट होने की बात भी कह दी है.
दिल्ली रवाना होने से पहले पटना एयरपोर्ट पर चिराग ने एलजेपी के जेडीयू में विलय होने की खबरों पर जवाब देते हुए कहा कि जो लोग पार्टी से अलग हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द जेडीयू में शामिल हो जाना चाहिए. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि लोजपा में टूट की खबरों को बढ़ावा देने वाले जेडीयू को अपनी पार्टी को भी बचा लेना चाहिए क्योंकि जल्दी ही उनकी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है.
इसके अलावा उन्होंने चाचा पशुपति पारस को केंद्र में मंत्री बनने पर बधाई भी दी है. चिराग ने कहा कि चाचा ने मंत्री बनने के लिए पार्टी और परिवार को तोड़ने जैसे बड़े कदम उठाये हैं. इतना करने के बाद अब जब वे मंत्री बने हैं तो उन्हें ढेर साड़ी शुभकामनाएं.
आपको बता दें कि हाईकोर्ट में याचिका ख़ारिज होने के बाद आज शाम चिराग पासवान ने दिल्ली स्थित आवास पर लीगल टीम की बैठक बुलाई है. उन्होंने कहा कि आज लीगल टीम से बातचीत होने के बाद वह फैसला करेंगे कि उन्हें आगे कौन से कदम उठाने हैं.
जानकारी हो कि चिराग पासवन की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और शीर्ष नेतृत्व को धोखा देने की वजह से एलजेपी पहले ही पशुपति पारस को पार्टी से बाहर निकाल चुकी है. वे अब लोक जनशक्ति पार्टी के सदस्य नहीं हैं. राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुल 75 सदस्य हैं और इनमें से 66 सदस्य हमारे (चिराग गुट) साथ हैं. सभी ने इसे लेकर हलफनामा दिया है. चिराग पासवान का कहना है कि उनके चाचा के पास कोई ठोस आधार नहीं है.
इसपर दिल्ली हाईकोर्ट में स्पीकर के वकील ने बताया कि उन्होंने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष से बात की है. उनकी तरफ से जानकारी दी गई है कि इस मामले को वो देख रहे हैं. वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला भी दिया. फिर कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में अभी कोई आदेश नहीं दे सकते क्योंकि स्पीकर इस मामले को देख रहे हैं. स्पीकर के वकील ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं है, जब लोकसभा स्पीकर खुद इस मामले को देख रहे हैं. चिराग के वकील ने स्पीकर के इस बात का कोई विरोध नहीं किया.
पशुपति पारस की ओर से पेश वकील ने कहा कि जो लेटर पारस ने स्पीकर को दिया था, उस समय पारस पार्टी के चीफ थे और बाद में पार्टी के लीडर चुने गए. तब कोर्ट ने कहा कि आपको चुनाव आयोग जाना चाहिए. यहां नहीं आना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि ये याचिका यहां पर मेंटिनेबल नहीं है.