DESK: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, मनोरंजन और सोशल मीडिया से लेकर रोजमर्रा के कई काम अब मोबाइल के जरिए ही होते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा और लगातार स्मार्टफोन का इस्तेमाल युवाओं और किशोरों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। यही कारण है कि न्यूरोलॉजिस्ट के पास अब बड़ी संख्या में ऐसे युवा पहुंच रहे हैं, जिन्हें लंबे समय तक स्क्रीन देखने से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं।
युवाओं में बढ़ रहे हैं ये लक्षण
विशेषज्ञों का यह कहना है कि अत्यधिक स्मार्टफोन इस्तेमाल के कारण युवाओं में बार-बार सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद की कमी, चक्कर आना, दिमाग में धुंधलापन (ब्रेन फॉग) महसूस होना और छोटी-छोटी बातें भूलने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
क्यों पड़ता है दिमाग पर असर?
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लगातार नोटिफिकेशन आना, सोशल मीडिया पर बिना रुके स्क्रॉल करना और एक ऐप से दूसरे ऐप पर बार-बार जाना मस्तिष्क को हर समय सक्रिय बनाए रखता है। धीरे-धीरे दिमाग को लगातार नई जानकारी और उत्तेजना की आदत पड़ जाती है, जिससे किसी एक काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि कई लोग पढ़ाई, मीटिंग या किताब पढ़ते समय भी बार-बार मोबाइल देखने लगते हैं।
नींद और याददाश्त पर भी पड़ता है असर
डॉक्टरों के मुताबिक, देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है। यह हार्मोन हमारी नींद और जागने के चक्र को नियंत्रित करता है। पर्याप्त नींद न मिलने से याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही चिंता, तनाव, अवसाद और लंबे समय तक रहने वाले सिरदर्द की समस्या भी बढ़ सकती है।
'टेक्स्ट नेक' और डिजिटल थकान का खतरा
लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस स्थिति को 'टेक्स्ट नेक' कहा जाता है, जिससे टेंशन हेडेक और माइग्रेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार स्क्रीन देखने से डिजिटल थकान भी बढ़ती है, जिसके कारण व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ, चिड़चिड़ा और काम में रुचि न लेने वाला महसूस कर सकता है।
बच्चों और किशोरों पर अधिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और किशोरों पर अत्यधिक स्क्रीन टाइम का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है, क्योंकि उनका मस्तिष्क अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता। ज्यादा स्क्रीन टाइम उनकी पढ़ाई, नींद, शारीरिक गतिविधियों और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे करें बचाव
डॉक्टरों का कहना है कि समस्या स्मार्टफोन नहीं, बल्कि उसका अनियंत्रित उपयोग है। इससे बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं—
20-20-20 नियम अपनाएं। हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें।
स्क्रीन से नियमित अंतराल पर ब्रेक लें।
सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दें।
मोबाइल का इस्तेमाल करते समय सही मुद्रा में बैठें।
नियमित व्यायाम करें और रोज कुछ समय खुली हवा में बिताएं।
जरूरत के अनुसार ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करें और स्क्रीन टाइम को सीमित रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखकर और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर 'स्मार्टफोन ब्रेन' जैसी समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।