Animal Ride Weight Limit: अगर आप भी छुट्टियों में कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं और वहां घोड़े की सवारी, ऊंट सफारी या खच्चर से यात्रा करने का सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अब सिर्फ टिकट और होटल बुकिंग ही काफी नहीं, बल्कि आपका वजन भी तय करेगा कि आप इन सवारी का आनंद ले पाएंगे या नहीं।


पहाड़ों की ठंडी वादियों में घोड़े की सवारी हो, रेगिस्तान में ऊंट पर बैठकर सफर करना हो या धार्मिक यात्राओं में खच्चरों का सहारा, यह सब लंबे समय से पर्यटन का अहम हिस्सा रहा है। लेकिन अब दुनिया भर में इन पर नए नियम लागू होने लगे हैं। वजह साफ है, जानवरों की सेहत और उन पर पड़ने वाला अत्यधिक भार।


बदल रहा है सवारी का नजरिया

पहले लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे जानवरों पर सवारी कर लेते थे। यह एक रोमांचक अनुभव माना जाता था। लेकिन अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या हमारी यह खुशी जानवरों के लिए दर्द बन रही है?


वैज्ञानिकों और पशु कल्याण संगठनों ने लगातार चेतावनी दी है कि जरूरत से ज्यादा वजन उठाने से जानवरों को गंभीर नुकसान होता है। उनकी रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है, जोड़ों में दर्द होता है और मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। कई मामलों में यह उनकी उम्र और काम करने की क्षमता दोनों को प्रभावित करता है।


विशेषज्ञों के मुताबिक, एक घोड़ा अपने शरीर के वजन का केवल लगभग 20% तक ही सुरक्षित रूप से भार उठा सकता है। गधे के लिए यह सीमा और भी कम मानी जाती है, जबकि ऊंट भी सीमित वजन के साथ ही लंबी दूरी तय कर सकता है।


दुनिया में सख्त हो रहे नियम

अब विदेशों में इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है और कई जगहों पर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं।


    •    Greece में 100 किलो से ज्यादा वजन वाले लोगों को गधों की सवारी करने की अनुमति नहीं है।

    •    Spain में यह सीमा करीब 80 किलो तय की गई है।

    •    Egypt के कई पर्यटन स्थलों पर जानवरों की सवारी पर प्रतिबंध तक लगाया जा चुका है।

    •    वहीं Jordan में अब जानवरों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।


इन नियमों का मकसद साफ है—पर्यटन जारी रहे, लेकिन जानवरों को नुकसान पहुंचाए बिना।


भारत में भी हैं सख्त प्रावधान

भारत में भी जानवरों की सुरक्षा को लेकर कानून पहले से मौजूद हैं। Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 और Draught and Pack Animals Rules, 1965 के तहत यह तय किया गया है कि अलग-अलग जानवर कितनी अधिकतम भार क्षमता रखते हैं।


इन नियमों के अनुसार:

    •    गधा लगभग 50 किलो तक वजन उठा सकता है

    •    टट्टू करीब 70 किलो तक

    •    ऊंट लगभग 250 किलो तक भार उठा सकता है


इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि जानवरों से लगातार लंबे समय तक काम नहीं कराया जाएगा और उन्हें बीच-बीच में पर्याप्त आराम दिया जाएगा।


2025 में आए नए दिशा-निर्देश

हाल ही में 2025 में सरकार ने तीर्थ यात्राओं में इस्तेमाल होने वाले जानवरों के लिए और भी सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।


नए नियमों के मुताबिक:

    •    गधे पर केवल 25 किलो तक

    •    टट्टू पर 50 किलो तक

    •    घोड़े या खच्चर पर 80–90 किलो तक ही वजन सुरक्षित माना गया है


इसके अलावा कई और अहम प्रावधान भी जोड़े गए हैं—जैसे रात के समय जानवरों से काम नहीं लिया जाएगा, बीमार जानवरों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य होगा।


जमीन पर नियमों की अनदेखी


हालांकि कागजों पर नियम सख्त हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर अलग नजर आती है। शिमला, मसूरी जैसे हिल स्टेशनों पर घोड़े की सवारी हो या राजस्थान में ऊंट सफारी—अक्सर इन नियमों का पालन पूरी तरह नहीं होता।


अधिकतर जगहों पर न तो सवारी करने वाले व्यक्ति का वजन ठीक से जांचा जाता है और न ही जानवरों को पर्याप्त आराम दिया जाता है। कई बार एक ही जानवर से लगातार घंटों तक काम लिया जाता है, जिससे उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।


बढ़ती जागरूकता, बदलती सोच


अब धीरे-धीरे लोगों के बीच भी जागरूकता बढ़ रही है। पर्यटक यह समझने लगे हैं कि मनोरंजन के नाम पर जानवरों को तकलीफ देना सही नहीं है।


इसी कारण दुनिया भर में सख्ती बढ़ाई जा रही है और कई जगहों पर जानवरों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव और तेज हो सकता है, जहां पर्यटन और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।


अगर आप भी अगली यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ जगह ही नहीं, बल्कि इन नियमों को भी ध्यान में रखें, ताकि आपका सफर यादगार भी बने और किसी बेजुबान को तकलीफ भी न हो।